सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। सोमवार को लोकसभा में पेश होने वाले संशोधन विधेयक में फास्ट ट्रैक कोर्ट, सख्त सजा, समयबद्ध जांच और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।
लोकसभा में पेश होगा नया संशोधन विधेयक
केंद्र सरकार सोमवार को मानसून सत्र के दौरान ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर कड़ा शिकंजा कसना है। सरकार का कहना है कि नए कानून से सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया जाएगा।
हर राज्य में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
संशोधन विधेयक के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना अनिवार्य होगा। राज्यों को किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया जाएगा।
जांच की समयसीमा और सख्त सजा का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों के लिए न्यूनतम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है।
मौजूदा कानून से और होगा सख्त
वर्तमान में लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत सामान्य मामलों में 3 से 5 वर्ष की जेल और संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा तथा कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। नया संशोधन इन प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाएगा।
परीक्षा प्रक्रिया के लिए नई गाइडलाइंस
विधेयक में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई गाइडलाइंस भी प्रस्तावित की गई हैं। इनमें परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा के दौरान निगरानी तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब की व्यवस्था शामिल है। साथ ही प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी सहित 15 गतिविधियों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
जरूरत पड़ने पर बनेगी विशेष टास्क फोर्स
संशोधन विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार किसी भी पेपर लीक मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) का गठन कर सकेगी। इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही 24 जुलाई को मंजूरी दे चुका है। अब इसे लोकसभा में पेश कर चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

