जिम्बाब्वे दौरे पर वैभव सूर्यवंशी ने परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल में बदलाव कर प्रभावित किया, जबकि अभिषेक शर्मा लगातार एक ही अंदाज में आउट होते रहे।
प्रतिभा किसी भी खिलाड़ी को टीम इंडिया तक पहुंचा सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक टिके रहने के लिए लगातार खुद को बदलना पड़ता है। विदेशी दौरे पर भारतीय टीम के दो युवा बल्लेबाजों ने इसी फर्क की अलग-अलग तस्वीर पेश की। एक ओर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने हालात के मुताबिक अपने खेल में बदलाव कर परिपक्वता दिखाई, वहीं 25 वर्षीय अभिषेक शर्मा लगातार उसी बल्लेबाजी शैली पर टिके रहे, जिसे विरोधी गेंदबाज पढ़ चुके थे।
अभिषेक शर्मा के आउट होने का तरीका बना चिंता का विषय
अभिषेक शर्मा ने आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर 49, 59 और 43 रन जैसी उपयोगी पारियां जरूर खेलीं, लेकिन लगभग हर मैच में उनके आउट होने का तरीका एक जैसा रहा। वह क्रीज से हटकर ऑफ साइड में आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश करते रहे। विरोधी गेंदबाजों ने उनकी इस रणनीति को समझ लिया और लगातार उसी योजना के तहत उन्हें आउट किया। कभी बाहरी किनारा विकेटकीपर के हाथों पहुंचा तो कभी बैकवर्ड प्वाइंट पर कैच थमा बैठे।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार बदलाव जरूरी
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर बल्लेबाज के खेल का बारीकी से विश्लेषण किया जाता है। वीडियो एनालिस्ट और गेंदबाज बल्लेबाज की हर कमजोरी पर काम करते हैं। यही कारण है कि विराट कोहली, रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव जैसे बल्लेबाज समय-समय पर अपनी तकनीक और शॉट चयन में बदलाव करते रहे हैं। बड़े खिलाड़ी अपनी पहचान बनाए रखते हैं, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार खेलने का तरीका बदलना भी जानते हैं।
वैभव सूर्यवंशी ने दिखाई मैच्योर बल्लेबाजी
जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल से अलग बल्लेबाजी की। कठिन पिच पर उन्होंने शुरुआत में धैर्य दिखाया, विकेट की गति को समझा, सिंगल और डबल लेकर पारी को आगे बढ़ाया और सेट होने के बाद बड़े शॉट लगाए। उन्होंने 31 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जिसने यह साबित किया कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल को ढाल सकते हैं।
मानसिकता भी बन सकती है चुनौती
विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मिली सफलता के कारण अभिषेक शर्मा अपने आक्रामक अंदाज से बाहर निकलने में हिचकिचा रहे हैं। कई बल्लेबाजों को यह डर रहता है कि यदि उन्होंने अपने प्राकृतिक खेल की गति बदली तो उनकी पहचान प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता उन्हीं खिलाड़ियों को मिलती है जो जरूरत पड़ने पर जोखिम कम करने और धैर्य से खेलने का साहस दिखाते हैं।
अक्टूबर से पहले करना होगा बदलाव
भारत का अगला टी20 मुकाबला अक्टूबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला जाएगा। ऐसे में अभिषेक शर्मा के पास अपने खेल, तकनीक, मानसिकता और शॉट चयन पर काम करने का पर्याप्त समय है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब उन्हें केवल बड़े शॉट लगाने की नहीं, बल्कि सही समय पर शॉट छोड़ने, सिंगल लेने और धैर्य दिखाने की कला पर भी काम करना होगा।
विदेशी दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती। जो खिलाड़ी परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलते हैं, वही लंबे समय तक सफल रहते हैं। जिम्बाब्वे दौरे पर वैभव सूर्यवंशी ने इसकी झलक दिखाई, जबकि अभिषेक शर्मा के सामने अब अपने खेल में जरूरी बदलाव करने की बड़ी चुनौती है।

