किराना हिल्स में क्यों उठा था धुआं? पूर्व CDS अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दी अहम जानकारी

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा और किराना हिल्स इलाके को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने सरगोधा और उसके आसपास पाकिस्तानी रडार सिस्टम की तलाश के लिए कई लोइटरिंग मिशन भेजे थे। इसी दौरान एक मिशन के किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराने की संभावना जताई गई है। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और यहां पाकिस्तान की परमाणु सुविधाएं मौजूद होने की बात कही जाती है।

सरगोधा के आसपास रडार तलाशने भेजे गए थे लोइटरिंग मिशन

पूर्व CDS अनिल चौहान के मुताबिक, इन लोइटरिंग मिशनों का मुख्य उद्देश्य सरगोधा और उसके आसपास मौजूद रडार सिस्टम की तलाश करना था। ये मिशन करीब दो घंटे तक इलाके में मंडरा सकते थे। अगर इस दौरान कोई लक्ष्य नहीं मिलता था, तो मिशन खत्म होने पर वे नीचे गिरकर किसी स्थान से टकरा जाते थे।

चौहान ने कहा कि संभव है कि ऐसा ही एक लोइटरिंग मिशन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से जा टकराया हो। इसी वजह से बाद में यह सवाल उठा कि क्या भारत ने किराना हिल्स को भी निशाना बनाया था।

किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरें आई थीं सामने

पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तानी मीडिया में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता हुआ दिखाई दे रहा था। हालांकि, उनके मुताबिक लोइटरिंग मिशन के पहाड़ी से टकराने की संभावना को इस घटना से जोड़कर देखा गया।

पाकिस्तान ने बातचीत का अनुरोध किया, फिर सरगोधा पर हमले की मंजूरी

अनिल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत का अनुरोध किए जाने के बाद वायुसेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमला करने की मंजूरी मांगी थी। चौहान ने हमले के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दे दी थी और दो अन्य लक्ष्यों की पहचान करने को भी कहा था।

उनके मुताबिक, इनमें से एक लक्ष्य स्कर्दू था। हालांकि, बाद में मौसम खराब होने के कारण लक्ष्य बदलकर भोलारी करना पड़ा।

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति पहले के अभियानों से अलग थी

पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पहले की सैन्य कार्रवाइयों से अलग था। उनके मुताबिक, इस अभियान में अपनाई गई रणनीति को लेकर कोई अनिश्चितता या हिचकिचाहट नहीं थी।

उरी हमले के बाद भारत ने जमीनी सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जबकि पुलवामा हमले के बाद भारी सैन्य बल के साथ एयरस्ट्राइक का विकल्प चुना गया था। इसके विपरीत, ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस का इस्तेमाल करते हुए एक नया तरीका अपनाया गया।

इस रणनीति का उद्देश्य आमने-सामने की लड़ाई का जोखिम कम करना, ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित करना और पाकिस्तान को प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त मौका दिए बिना तेज और सटीक कार्रवाई करना था।

तीन चरणों में चला था ऑपरेशन सिंदूर

पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कार्रवाई को तीन प्रमुख चरणों में देखा जा सकता है।

पहला चरण- 6-7 मई को सर्जिकल स्ट्राइक

ऑपरेशन सिंदूर का पहला चरण 6-7 मई को हुआ। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर सर्जिकल स्ट्राइक की।

दूसरा चरण- 8-9 मई को ड्रोन से छकाने की कोशिश

ऑपरेशन का दूसरा चरण 8-9 मई को रहा। इस दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों पक्षों ने ड्रोन का इस्तेमाल किया। ड्रोन के जरिए एक-दूसरे की सुरक्षा व्यवस्था को परखने और भ्रमित करने की कोशिश की गई।

तीसरा चरण- 10 मई को पाकिस्तान का हमला और भारत का जवाब

तीसरे चरण में 10 मई को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हमला किया। इसके जवाब में भारतीय सेना और वायुसेना ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

अनिल चौहान के मुताबिक, इस तरह ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिन की सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि तीन अलग-अलग चरणों में चला अभियान था।

डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर दावे पर क्या बोले अनिल चौहान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में मध्यस्थता करने के दावे पर पूर्व CDS अनिल चौहान ने कहा कि दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच ही सीजफायर का फैसला हुआ था।

चौहान के मुताबिक, DGMO ने बताया था कि वह करीब 3 बजे तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद शाम 5 बजे फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि सीजफायर का निर्णय दोनों देशों के DGMOs के बीच हुआ और उन्हें इसमें किसी अन्य की भूमिका नजर नहीं आती।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका को भारत के आधिकारिक ऐलान से पहले सीजफायर की जानकारी कैसे मिली। चौहान ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि यह जानकारी भारत की ओर से लीक नहीं हुई थी और संभव है कि यह सूचना दूसरी तरफ से लीक हुई हो।

पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को लेकर समझ कमजोर थी

पूर्व CDS ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की भारत की सैन्य गतिविधियों को लेकर समझ काफी कमजोर थी। उन्होंने बताया कि समुद्री क्षेत्र में भी पाकिस्तान की स्थिति को लेकर उसकी जानकारी सटीक नहीं थी।

भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की लोकेशन पर भी गलत जानकारी

जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, पाकिस्तान की रोजाना की ब्रीफिंग में अरब सागर में भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की लोकेशन बताई जाती थी। हालांकि, जब उन्होंने वेस्टर्न नेवल कमांड से उन दिनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली, तो पता चला कि भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप बताई गई जगह से करीब 100 से 300 नॉटिकल मील दूर था।

उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हो सकता है कि पाकिस्तान को भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप को लेकर गलत इनपुट मिल रहे थे या उसकी जानकारी सटीक नहीं थी। चौहान के मुताबिक, पाकिस्तान ऐसी जानकारी के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर था, क्योंकि उसके लॉन्ग रेंज मैरीटाइम एयरक्राफ्ट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उड़ान नहीं भरी थी।

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