अनाया बांगड़ का बड़ा सपना, अब भारत के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहती हैं; बोलीं- देश के लिए कुछ जीतना है

Thecity news
5 Min Read

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से प्रीमियर क्रिकेट खेलने की मंजूरी मिलने के बाद अनाया की नजर भारतीय टीम पर, वापसी के सफर को बताया बेहद मुश्किल

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ ने क्रिकेट में वापसी का रास्ता मिलने के बाद अपने सबसे बड़े सपने का खुलासा किया है। अनाया अब सिर्फ मैदान पर वापसी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनकी नजर भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने और देश के लिए बड़े खिताब जीतने पर है। उनका सपना एक दिन भारत के लिए महिला विश्व कप जीतना है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने दी प्रीमियर क्रिकेट खेलने की मंजूरी

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया बांगड़ को फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में प्रीमियर क्रिकेट खेलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि, मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में उनकी वापसी पात्रता संबंधी नीति की शर्तों पर निर्भर करेगी। यह मंजूरी किसी खास टीम में जगह मिलने की गारंटी नहीं है, लेकिन अनाया इसे अपने क्रिकेट करियर को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही हैं।

अब उनका शुरुआती लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया में क्लब क्रिकेट खेलकर अपनी फिटनेस और मैच लय हासिल करना है। इसके बाद वह अपने प्रदर्शन के दम पर महिला बिग बैश लीग में जगह बनाने की कोशिश करेंगी।

‘मैं एक दिन भारत के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहती हूं’

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में अनाया बांगड़ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से महिला क्रिकेट के लिए ऐसी नीतियां बनाने की उम्मीद जताई, जो समावेशी होने के साथ निष्पक्ष और सम्मानजनक भी हों।

उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि बीसीसीआई इस मुद्दे पर विचार करे और महिला खेल के लिए ऐसी नीतियां तैयार करे जो समावेशी, निष्पक्ष और सम्मानजनक हों। अनाया ने कहा कि वह एक दिन भारत के लिए विश्व कप जीतना चाहती हैं और देश के लिए कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करना उनका सपना है।

इससे साफ है कि अनाया की महत्वाकांक्षा सिर्फ क्लब क्रिकेट या महिला बिग बैश लीग तक सीमित नहीं है। वह आगे चलकर भारतीय टीम में जगह बनाकर देश के लिए बड़े टूर्नामेंट जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं।

वापसी का सफर आसान नहीं रहा

अनाया ने बताया कि दोबारा क्रिकेट के मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद मुश्किल रहा। उन्हें सार्वजनिक आलोचनाओं के साथ-साथ निजी जिंदगी में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि परिवार से कुछ हद तक मदद मिली, लेकिन पूरे सफर के दौरान उन्हें ऐसा महसूस नहीं हुआ कि परिवार पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।

मुश्किल दौर में क्रिकेट से दूरी के साथ उनकी निजी जिंदगी में भी कई परेशानियां आईं। इन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक और व्यक्तिगत स्तर पर काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया।

ब्रिटेन में पांच महीने ड्रेसिंग रूम में रहना पड़ा

अनाया ने अपने संघर्ष के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि ब्रिटेन में एक समय ऐसा भी आया, जब वह करीब पांच महीने तक ड्रेसिंग रूम में रहकर गुजारा कर रही थीं। उस समय उनका मकसद किसी तरह खुद को संभालना और आगे बढ़ते रहना था।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। सोशल मीडिया के जरिए उन्हें ब्रांड डील मिलीं, जिससे उन्होंने अपनी कुछ मेडिकल प्रक्रियाओं के लिए आर्थिक मदद जुटाई। अनाया के मुताबिक, इस पूरे दौर ने उन्हें कई तरह की मुश्किल परिस्थितियों से लड़ना सिखाया।

‘अकेलेपन ने मुझे मजबूत बनाया’

अनाया ने कहा कि उनका सफर बेहद कठिन रहा, लेकिन अकेलेपन ने उन्हें खुद को समझने और मजबूत बनने में मदद की। उनके मुताबिक, इस अनुभव के बाद उनके भीतर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास आया है।

अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से मिली मंजूरी को वह अपने सफर का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत मान रही हैं। उनका फोकस ऑस्ट्रेलिया में क्लब क्रिकेट के जरिए फिटनेस और लय हासिल करने पर है। इसके बाद वह महिला बिग बैश लीग में अपनी जगह बनाने की कोशिश करेंगी और लंबे समय में भारतीय टीम के लिए खेलने तथा देश को विश्व कप जिताने का सपना पूरा करना चाहती हैं।

Share This Article