NCRB Abhigyan App News: देश में अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, सटीक और तकनीक आधारित बनाने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने ‘अभिज्ञान’ (Abhigyan) नाम का नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किए गए इस ऐप की मदद से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर ही फिंगरप्रिंट स्कैन कर संदिग्ध व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकेंगी।
अपराध जांच में तकनीक का बड़ा कदम
देश की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। NCRB द्वारा विकसित ‘अभिज्ञान’ ऐप को देश के सबसे बड़े फिंगरप्रिंट डेटाबेस NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) से जोड़ा गया है।
इस डेटाबेस में लाखों आरोपियों, दोषियों और कैदियों के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सुरक्षित हैं। अब पुलिस अधिकारी फिंगरप्रिंट स्कैन कर सीधे राष्ट्रीय डेटाबेस से जानकारी हासिल कर सकेंगे।
सड़क पर ही होगी संदिग्धों की पहचान
अब तक किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट का मिलान करने के लिए उसे थाने या जिला मुख्यालय ले जाना पड़ता था, जिससे जांच में समय लगता था। लेकिन नए सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर का उपयोग कर मौके पर ही संदिग्ध व्यक्ति के अंगूठे के निशान स्कैन कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, फिंगरप्रिंट स्कैन होने के बाद उसका मिलान राष्ट्रीय डेटाबेस से महज 35 सेकंड के भीतर पूरा हो जाएगा। इससे वांछित अपराधियों और फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
स्मार्टफोन पर मिलेगा रियल-टाइम रिजल्ट
फिलहाल देशभर में फिंगरप्रिंट जांच की सुविधा केवल 1,556 वर्कस्टेशनों तक सीमित है, जिसके कारण कई बार जांच प्रक्रिया में देरी होती थी। लेकिन ‘अभिज्ञान’ ऐप के माध्यम से पुलिस अधिकारी सीधे अपने स्मार्टफोन पर संदिग्ध व्यक्ति का रिकॉर्ड देख सकेंगे।
यह ऐप टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित होगा और रियल-टाइम परिणाम उपलब्ध कराएगा। इससे जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता में सुधार होने के साथ-साथ अपराधियों की पहचान भी पहले से कहीं अधिक तेज हो जाएगी।
1.3 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड उपलब्ध
NAFIS डेटाबेस में वर्तमान में लगभग 1.3 करोड़ संदिग्धों और दोषियों का रिकॉर्ड मौजूद है। इसमें 9.91 लाख नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों, 3.65 लाख मानव तस्करी मामलों और विभिन्न जेल रिकॉर्ड्स का विशाल डेटा शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पुलिसिंग को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और डेटा-आधारित बनाने में मदद करेगी।
अमित शाह ने वैज्ञानिक जांच पर दिया जोर
अभिज्ञान ऐप के लॉन्च के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि केवल अपराधियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर सजा दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने जांच एजेंसियों से फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेशियल रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग करने की अपील की। उनके अनुसार वैज्ञानिक साक्ष्यों का बेहतर उपयोग अपराधियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत की कानून-व्यवस्था को मिलेगा नया तकनीकी आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि अभिज्ञान ऐप और NAFIS डेटाबेस का एकीकरण भारत में डिजिटल पुलिसिंग के नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है। इससे न केवल जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि अपराध नियंत्रण, पहचान सत्यापन और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।

