
वॉरेन बफेट की बर्कशायर हैथवे ने गूगल की मूल कंपनी Alphabet में 4.3 अरब डॉलर (करीब 378 अरब रुपये) का बड़ा निवेश किया है। यह निवेश कंपनी की 10वीं सबसे बड़ी इक्विटी हिस्सेदारी बन गया है।
SEC को दी गई फाइलिंग के अनुसार बर्कशायर के पास 30 सितंबर तक Alphabet के 1.785 करोड़ शेयर मौजूद थे।
Apple में घटाई हिस्सेदारी
इस बड़े निवेश के साथ बर्कशायर ने Apple में अपनी हिस्सेदारी 15% घटा दी है। कंपनी ने अपने पास मौजूद 28 करोड़ शेयरों को घटाकर 23.82 करोड़ कर दिया है।
बर्कशायर ने घोषणा की कि उसने अपने पास मौजूद 90.5 करोड़ शेयरों में से लगभग तीन-चौथाई हिस्सेदारी बेच दी।
इसके बावजूद Apple अब भी 60.7 अरब डॉलर (5,341 अरब रुपये) के साथ बर्कशायर की सबसे बड़ी होल्डिंग बनी हुई है।
चौंकाने वाला है बफेट का यह बदलाव
बफेट की पारंपरिक वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति और तकनीकी कंपनियों के प्रति आम तौर पर दूरी बनाए रखने की आदत को देखते हुए Alphabet में निवेश करना विश्लेषकों के लिए आश्चर्यजनक फैसला माना जा रहा है।
बफेट पूर्व में Apple को एक टेक कंपनी की बजाय “उपभोक्ता उत्पाद कंपनी” मानते रहे हैं।
Alphabet में निवेश का निर्णय संभवतः बर्कशायर के निवेश प्रबंधकों टॉड कॉम्ब्स या टेड वेस्चलर ने लिया है।
अन्य कंपनियों में भी हिस्सेदारी में कटौती
Alphabet में निवेश बढ़ाने के साथ बर्कशायर ने Bank of America, Verisign और DaVita में भी हिस्सेदारी कम की है।
तकनीक-संचालित बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन के कारण कंपनी पिछले 13 तिमाहियों से शेयरों की शुद्ध विक्रेता बनी हुई है।
बफेट के रिटायरमेंट से पहले पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव
यह सभी बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब 95 वर्षीय वॉरेन बफेट वर्ष 2025 के अंत में CEO पद से हटने वाले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोर्टफोलियो रीकॉन्फिगरेशन कंपनी की भविष्य रणनीति को दर्शाता है और आने वाले नेतृत्व ट्रांज़िशन का संकेत भी देता है।

