BMC चुनाव का काउंटडाउन शुरू: हिंदी भाषी वोट बैंक पर BJP का फोकस, 21 उम्मीदवार उतारे मैदान में

Thecity news
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मुंबई समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। शनिवार को राज्य चुनाव आयोग सभी नगर निगमों के विभिन्न वार्डों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अधिकृत घोषणा करेगा। इसके साथ ही पूरे राज्य में धुआंधार चुनाव प्रचार की शुरुआत हो जाएगी।

देशभर की निगाहें इस बार मिनी विधानसभा कही जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर टिकी हुई हैं। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की रणनीति चुनाव को मराठी बनाम हिंदी भाषी रंग देने की है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) ने साफ तौर पर हिंदी भाषी वोट बैंक पर अपना फोकस केंद्रित किया है।


🗳️ मुंबई में 18 लाख हिंदी भाषी वोटर

अनुमानों के मुताबिक, मुंबई में करीब 18 लाख हिंदी भाषी मतदाता हैं। कभी यह वोट बैंक कांग्रेस का परंपरागत आधार माना जाता था, लेकिन 2014 के बाद इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला और यह झुकाव भाजपा की ओर हो गया।

इसी वोट बैंक की बदौलत 2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुंबई से रिकॉर्ड 15 विधायक जिताए थे। अब उसी रणनीति को दोहराते हुए भाजपा, BMC में अपना महापौर बनाने की दिशा में काम कर रही है।


🎯 BJP ने 227 में से 137 सीटों पर उतारे उम्मीदवार

भाजपा इस बार मुंबई महानगरपालिका की 227 सीटों में से 137 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इनमें से 21 उम्मीदवार हिंदी भाषी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि यह सामाजिक संतुलन BMC चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।


❌ किन नेताओं का कटा टिकट?

कई पुराने और दावेदार नेताओं को इस बार टिकट नहीं मिल सका—

  • गोरेगांव से नगरसेवक रहे दीपक ठाकुर OBC आरक्षण के कारण चुनाव से बाहर हो गए।
  • फालीना से इच्छुक नीतीश सिंह को टिकट नहीं मिला क्योंकि यह सीट शिंदे गुट को दी गई।
  • वार्ड 89 में अमरजीत सिंह और अजय सिंह की अंदरूनी खींचतान के चलते सीट शिंदे सेना को छोड़ दी गई।
  • पार्टी पदाधिकारी पंकज यादव का टिकट महिला आरक्षण के कारण कटा, अब उनकी पत्नी मैदान में हैं।
  • सुनीता यादव और सागर सिंह को स्थानीय विधायक अतुल भातखलकर के विरोध के चलते टिकट नहीं मिला।
  • कांदिवली से सिटिंग कार्यकर्ता कमलेश यादव के वार्ड के महिला आरक्षित होने पर उनकी बेटी को उम्मीदवार बनाया गया है।

बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी कुछ उम्मीदवारी के खिलाफ थे।

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