609 किमी छोटी सड़कों पर मशीन से सफाई होगी, जबकि आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम2.5 और पीएम10 के स्रोतों की लगातार निगरानी की जाएगी।
नई दिल्ली, 30 सितंबर।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी कार्रवाई के साथ वैज्ञानिक निगरानी मजबूत करने की दिशा में दो अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में छोटी सड़कों की मैकेनिकल सफाई बढ़ाने और प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान की व्यवस्था को मंजूरी दी गई।
सरकार के मुताबिक, इन फैसलों का मकसद प्रदूषण को केवल सर्दियों की समस्या मानने के बजाय पूरे साल उसके अलग-अलग स्रोतों पर कार्रवाई करना है। इसके तहत दिल्ली नगर निगम को 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं, आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम2.5 और पीएम10 के स्रोतों की लगातार निगरानी और वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
609 किमी छोटी सड़कों पर पहुंचेगी मैकेनिकल सफाई
कैबिनेट के फैसले के तहत 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली छोटी सड़कों को भी मैकेनिकल सफाई के दायरे में लाया जाएगा। सरकार के मुताबिक, ऐसी करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों की पहचान की गई है, जिनमें 250 वार्डों की 854 सड़कें शामिल हैं। इन सड़कों पर फिलहाल मशीनी सफाई की सुविधा सीमित है या उपलब्ध नहीं है।
सरकार के अनुसार, सड़क की धूल दिल्ली में पार्टिकुलेट प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। छोटी सड़कों को नियमित मैकेनिकल स्वीपिंग के दायरे में लाने से धूल के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इन सड़कों की सफाई के लिए 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मशीनें दी जाएंगी और उनके संचालन की जिम्मेदारी एमसीडी की होगी।
इस पूरी व्यवस्था पर अगले 10 वर्षों में करीब 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मशीनों के इस्तेमाल का उद्देश्य सफाई व्यवस्था को मशीनीकृत करने के साथ इस प्रक्रिया से होने वाले अतिरिक्त प्रदूषण को कम रखना है।
आईआईटी दिल्ली बताएगा, प्रदूषण कहां से आ रहा है
दूसरे फैसले के तहत दिल्ली में पीएम2.5 और पीएम10 के रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए दिल्ली सरकार आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगी।
इस तकनीक के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि किसी समय दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषण में अलग-अलग स्रोतों का कितना योगदान है। इसमें वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, सड़क की धूल, बायोमास जलाना और अन्य प्रमुख स्रोत शामिल होंगे।
सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और उनका वैज्ञानिक आकलन 24 घंटे किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों के आधार पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
राउज एवेन्यू की सुपर साइट और मोबाइल लैब फिर होंगी सक्रिय
परियोजना के तहत राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को दोबारा वैज्ञानिक संचालन के लिए सक्रिय किया जाएगा। इसके साथ ही मोबाइल लैब भी फिर से शुरू की जाएगी। मोबाइल लैब की मदद से दिल्ली के अलग-अलग प्रदूषण हॉटस्पॉट और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का लक्षित अध्ययन किया जा सकेगा।
परियोजना में रियल-टाइम डैशबोर्ड, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े काम भी शामिल हैं। आईआईटी दिल्ली के साथ यह सहयोग पांच साल के लिए होगा और इस पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पूरे साल प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई का दावा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को केवल सर्दियों में बढ़ने वाली समस्या नहीं मानती, बल्कि पूरे साल इसके स्रोतों पर काम कर रही है। सरकार के मुताबिक, सड़क की धूल, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों पर एक साथ काम किया जा रहा है।
कैबिनेट के दोनों फैसलों को सरकार की प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा बताया गया है। एक ओर छोटी सड़कों पर नियमित मैकेनिकल सफाई को बढ़ाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक निगरानी के जरिए प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उनके आधार पर कार्रवाई करने की कोशिश की जाएगी।

