बुलेट ट्रेन के उत्तरी कॉरिडोर को मंजूरी मिलने का दावा है, वहीं वाराणसी में डबल डेकर पुल 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में दो बड़ी परियोजनाओं की चर्चा है। दिल्ली से बनारस के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से यात्रा का समय घटकर करीब साढ़े तीन घंटे होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, वाराणसी में गंगा नदी पर बनने वाले नए सिग्नेचर ब्रिज का नाम ‘नमो ब्रिज’ रखा गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि यह पुल सड़क और रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के साथ वाराणसी के परिवहन ढांचे को भी मजबूत करेगा।

2029 तक तैयार होगा 2.5 किलोमीटर लंबा नमो ब्रिज
गंगा नदी पर बनने वाला नमो ब्रिज करीब 2.5 किलोमीटर लंबा होगा। इस परियोजना पर लगभग 2,657 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह डबल डेकर हाइब्रिड ब्रिज होगा। इसके ऊपरी हिस्से पर छह लेन का सड़क मार्ग और निचले हिस्से में चार रेल लाइनें बनाई जाएंगी। पुल तैयार होने से काशी रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर और नमो घाट जैसे प्रमुख स्थानों तक पहुंच आसान हो सकती है।
100 से ज्यादा ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुलेगा
नमो ब्रिज बनने से वाराणसी, बिहार और पूर्वांचल के रेल यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके जरिए 100 से अधिक अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावना जताई जा रही है। इससे मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने और यात्रियों को ज्यादा ट्रेनें उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
यह पुल तीन दिशाओं से वाराणसी की कनेक्टिविटी बेहतर करेगा। इसके साथ ही शहर के भीतर यातायात का दबाव और लंबे जाम कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
बुलेट ट्रेन का किराया हवाई टिकट से कम रखने की योजना
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन के किराये को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे केवल अमीरों के लिए उपलब्ध सुविधा बताकर भ्रम फैलाएंगे, जबकि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य किसानों, मध्यम वर्ग और गरीबों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना है।
रेल मंत्री के मुताबिक, दिल्ली से बनारस के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन का किराया हवाई जहाज के टिकट से कम रखने की योजना है। हालांकि, इस कॉरिडोर के संचालन और किराये से जुड़ी अंतिम जानकारी परियोजना की आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।

