भारतीय क्रिकेट के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा साल
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए यह साल मिश्रित नतीजों वाला रहा है। जहां एक ओर वनडे और टी20 फॉर्मेट में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और एसीसी एशिया कप का खिताब जीता, वहीं टेस्ट क्रिकेट में लगातार खराब प्रदर्शन ने चिंता बढ़ा दी है।
इस टेस्ट असफलता की आंच सीधे मुख्य कोच गौतम गंभीर तक पहुंची और उनके कार्यकाल को लेकर सवाल उठने लगे।
दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद बढ़ी हलचल
खबरों के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज हारने के बाद बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों ने गंभीर के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया था।
यहां तक कि अनौपचारिक रूप से वीवीएस लक्ष्मण से भी टेस्ट टीम के कोच बनने को लेकर बात की गई।
हालांकि, लक्ष्मण ने फिलहाल बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्रिकेट प्रमुख की भूमिका में बने रहने की इच्छा जताई।
2027 वर्ल्ड कप तक गंभीर को समर्थन
बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, गौतम गंभीर को बोर्ड का पूरा समर्थन हासिल है।
उनका मौजूदा करार 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक का है और यदि भारत आगामी टी20 वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन करता है या फाइनल तक पहुंचता है, तो गंभीर के पद पर बने रहने की पूरी संभावना है।
सूत्रों का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में कोचिंग के लिए विकल्प सीमित हैं, जिससे गंभीर को अतिरिक्त बढ़त मिलती है।
भारत को खेलने हैं 9 अहम टेस्ट
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र के तहत भारत को अब भी 9 टेस्ट मैच खेलने हैं:
- अगस्त 2026: श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट
- अक्टूबर 2026: न्यूजीलैंड दौरा
- जनवरी-फरवरी 2027: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 टेस्ट (घरेलू सीरीज)
इन मैचों में भारत का प्रदर्शन तय करेगा कि टेस्ट फॉर्मेट में गंभीर का भविष्य कितना मजबूत रहता है।
ड्रेसिंग रूम में असहजता की चर्चा
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय ड्रेसिंग रूम में गंभीर के कार्यकाल के दौरान कुछ खिलाड़ी खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
कई खिलाड़ियों का मानना है कि राहुल द्रविड़ के दौर में उन्हें अपनी भूमिका साबित करने के लिए ज्यादा समय और भरोसा मिलता था।
टी20 वर्ल्ड कप टीम से शुभमन गिल को बाहर करने के फैसले में भी गंभीर की स्पष्ट छाप देखी गई, जिससे खिलाड़ियों में यह संदेश गया कि कोई भी सुरक्षित नहीं है।
आगे क्या?
टी20 वर्ल्ड कप के बाद दो महीने का आईपीएल सीजन होगा। इस दौरान बीसीसीआई के पास यह विकल्प रहेगा कि तीनों फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच रखे जाएं या एक ही कोच बनाए रखा जाए।
हालांकि, फिलहाल संकेत यही हैं कि बीसीसीआई कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगी और गौतम गंभीर को अपना समर्थन जारी रखेगी।

