भारतीय सर्राफा बाजार में 21 जून 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं पर लगातार तीसरे सप्ताह दबाव बने रहने का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली तेज कर दी, जिससे सोना और चांदी दोनों के दाम फिसल गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान ने कीमती धातुओं की मांग को प्रभावित किया है, जिसके चलते बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।
24 कैरेट सोने की कीमत में 2,840 रुपये की गिरावट
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 2,840 रुपये घटकर 1,50,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में भी 2,070 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 1,47,239 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत भी दबाव में रही और 60.70 डॉलर की गिरावट के साथ 4,148.45 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार सोने का मूल्य 1,44,970 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक आ गया है।
चांदी में भी बड़ी गिरावट, 8,040 रुपये तक फिसले दाम
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक चांदी 8,040 रुपये टूटकर 2,40,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
एमसीएक्स पर चांदी के वायदा अनुबंध में भी 4,836 रुपये की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव 2,32,736 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत 64.73 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान वार्ता में अनिश्चितता का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित उच्च स्तरीय वार्ता टलने से वैश्विक बाजारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्विस विदेश मंत्रालय की ओर से बातचीत स्थगित किए जाने की जानकारी के बाद निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रस्तावित यात्रा टलने से भी बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।
मजबूत डॉलर बना कीमती धातुओं के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती सोने और चांदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोने और चांदी जैसी धातुओं में निवेश घटता है, जिससे उनके दामों पर दबाव बढ़ता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों को लेकर जारी अनिश्चितता भी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है। इसी वजह से सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
लगातार तीसरे सप्ताह की गिरावट ने सर्राफा बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के अगले संकेतों का इंतजार करना चाहिए।
हालांकि कीमतों में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन निवेश के दृष्टिकोण से बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की दिशा?
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो सर्राफा बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है।

