इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में छात्रों का प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। IIT दिल्ली प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शनकारी छात्रों की बैठक हुई। Red Square में खुली बैठक से पहले ऋषिकेश कुमार की याद में दो मिनट का मौन रखा गया, जिसके बाद छात्रों ने मामले और संस्थान की व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने उठाए ये सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऋषिकेश कुमार के मानसिक स्वास्थ्य और संस्थान की व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं। छात्रों ने पूछा कि क्या उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी विभाग के प्रोफेसरों को थी और क्या उनके साथ किसी तरह का पूर्वाग्रह या भेदभाव किया गया था।
छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कैंपस में ऋषिकेश कुमार का अलग-थलग पड़ना उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने की एक वजह बना। इसके अलावा हॉस्टल, विभाग और काउंसलिंग सर्विस की जवाबदेही तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए गए हैं।
IIT दिल्ली की अकादमिक व्यवस्था पर भी सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों ने IIT दिल्ली की अकादमिक व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि संस्थान की अकादमिक ब्यूरोक्रेसी जटिल और छात्रों के लिए कई बार अव्यावहारिक है। छात्रों के मुताबिक, नियमों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी सही समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती।
एक केमिस्ट्री छात्र के हवाले से दावा किया गया कि उन्हें अपने प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कभी-कभी केवल एक क्रेडिट की कमी के कारण पूरे साल दोहराना पड़ सकता है, जिससे छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।
हॉस्टल और कैंपस व्यवस्था को लेकर भी चिंता
प्रदर्शनकारी छात्रों ने हॉस्टल और कैंपस से जुड़े मुद्दों को भी बैठक में उठाया। उनका कहना है कि कैंपस से बाहर रहने का छात्रों की मानसिक स्थिति और सामाजिक जुड़ाव पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एक अन्य छात्र ने आरोप लगाया कि एक छात्र को काउंसलर द्वारा उसकी इच्छा के खिलाफ अस्पताल में भर्ती कराया गया और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने तक कैंपस में प्रवेश नहीं दिया गया। छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में संस्थान की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाने की मांग की है।
प्रशासन के साथ Open House की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने IIT दिल्ली प्रशासन के साथ जल्द से जल्द Open House आयोजित करने की मांग की है। छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की बात भी कही है।
Associate Dean Student Welfare के कथित बयानों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में संस्थान के रवैये पर भी प्रदर्शनकारी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन को उनके सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
छात्रों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऋषिकेश कुमार के साथ हुए व्यवहार और उनकी मौत से पहले की घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल सार्वजनिक करने, मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों की मदद की प्रक्रिया स्पष्ट करने और किसी छात्र को कैंपस से हटाने या वापस बुलाने से जुड़े नियमों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
इसके अलावा मेडिकल फिटनेस या अनफिटनेस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया सार्वजनिक करने और IIT दिल्ली की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग भी उठाई गई है।
30 महीनों में 8 छात्रों की मौत का दावा
प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया है कि IIT दिल्ली में पिछले 30 महीनों में 8 छात्रों ने आत्महत्या की है। छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को अलग-अलग मामलों के तौर पर देखने के बजाय संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यापक समस्या की समीक्षा की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से मानसिक स्वास्थ्य के लिए उठाए गए कदमों की स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। इसके साथ ही Students’ Mental Well-being on Campus से जुड़ी Expert Committee Report की सिफारिशों पर हुए अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

