JEE Advanced 2026: AIR 32 वाले छात्र ने छोड़ी IIT बॉम्बे की सीट, जुड़वां भाई के साथ रहने के लिए चुना IIT कानपुर

Thecity news
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जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजों के बाद दो जुड़वां भाइयों की कहानी देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। मह्रूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान ने एक साथ परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां तब बटोरीं जब AIR 32 हासिल करने वाले मह्रूफ ने आईआईटी बॉम्बे की प्रतिष्ठित सीट छोड़कर अपने भाई के साथ आईआईटी कानपुर में दाखिला लेने का फैसला किया।

दोनों भाइयों ने हासिल की शानदार रैंक

18 वर्षीय जुड़वां भाइयों ने जेईई एडवांस्ड 2026 में शानदार प्रदर्शन किया।

  • मह्रूफ अहमद खान – ऑल इंडिया रैंक (AIR) 32
  • मसरूर अहमद खान – ऑल इंडिया रैंक (AIR) 169

मह्रूफ की रैंक के आधार पर उन्हें आईआईटी बॉम्बे में बीटेक कंप्यूटर साइंस में प्रवेश मिल सकता था, लेकिन मसरूर को उसी संस्थान और शाखा में सीट मिलने की संभावना नहीं थी। ऐसे में दोनों भाइयों ने अलग-अलग संस्थानों में पढ़ने के बजाय आईआईटी कानपुर के बीटेक कंप्यूटर साइंस कार्यक्रम में साथ पढ़ने का निर्णय लिया।

“भाई से बढ़कर कुछ नहीं”

एक रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी कानपुर के ओरिएंटेशन से पहले मह्रूफ ने कहा,

“मुझे आईआईटी बॉम्बे छोड़कर अपने भाई के साथ आईआईटी कानपुर आने का कोई पछतावा नहीं है। मेरे लिए मेरे भाई से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”

दोनों भाइयों ने कोटा में तीन वर्षों तक साथ रहकर जेईई की तैयारी की थी और अब एक बार फिर एक ही संस्थान में पढ़ाई करेंगे।

मसरूर बोले- यह त्याग कभी नहीं भूलूंगा

मसरूर ने अपने भाई के फैसले को जीवन का सबसे बड़ा त्याग बताते हुए कहा,

“हम हमेशा की तरह साथ रहेंगे, एक-दूसरे की गलतियों को सुधारेंगे, मुश्किल समय में सहारा बनेंगे और सबसे अच्छे दोस्त बने रहेंगे।”

अब एक ही कमरे में रहेंगे दोनों भाई

शुरुआत में आईआईटी कानपुर प्रशासन ने दोनों को एक ही हॉस्टल में अलग-अलग कमरे आवंटित किए थे।

  • मसरूर को कमरा B-209
  • मह्रूफ को कमरा B-308

दोनों ने प्रशासन से अनुरोध किया, जिसके बाद उन्हें हॉल ऑफ रेजिडेंस-13 के कमरा B-103 में साथ रहने की अनुमति दे दी गई। इससे अब दोनों साथ रहकर पढ़ाई और दैनिक गतिविधियां कर सकेंगे।

मां ने बेटों के लिए छोड़ी नौकरी

दोनों भाइयों की सफलता में उनकी मां डॉ. जीनत बेगम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वह पेशे से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) हैं।

जब दोनों बेटों ने कोटा जाकर जेईई की तैयारी करने का निर्णय लिया, तब उन्होंने ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड अस्पताल की नौकरी छोड़ दी और बेटों के साथ कोटा चली गईं, ताकि वे पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान दे सकें।

पिता ने भी निभाई अहम भूमिका

दोनों के पिता डॉ. मंसूर अहमद खान, जो मेडिसिन में एमडी हैं, नौकरी के कारण ओडिशा में ही रहे। वह हर दो-तीन महीने में कोटा जाकर बेटों से मिलते रहे और उनका उत्साह बढ़ाते रहे।

डॉ. जीनत बेगम ने कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि अलग-अलग रैंक आने के कारण दोनों को अलग-अलग आईआईटी मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि दोनों बेटे अब एक ही संस्थान और एक ही कमरे में रहकर अपना सपना पूरा करेंगे।

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