रेवाड़ी की रहने वाली डॉ. महिमा यादव ने जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटी से गणित में पीएचडी पूरी करने के बाद प्रतिष्ठित एक्सीलेंट अवॉर्ड हासिल किया, आईआईटी रुड़की से एमएससी में भी जीत चुकी हैं गोल्ड मेडल।
हरियाणा की बेटी डॉ. महिमा यादव ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। रेवाड़ी के कालका रोड स्थित विकास नगर निवासी डॉ. महिमा ने जर्मनी की एक सरकारी यूनिवर्सिटी से गणित विषय में पीएचडी पूरी की है। इसके बाद उत्कृष्ट शोध और अकादमिक उपलब्धियों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित एक्सीलेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे रेवाड़ी और हरियाणा में खुशी का माहौल है।
आईआईटी रुड़की से एमएससी में जीता था गोल्ड मेडल
डॉ. महिमा यादव विकास नगर निवासी एवं सूबेदार संजय यादव की पुत्री हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से एमएससी की पढ़ाई की, जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल मिला। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए जर्मनी में गणित विषय से पीएचडी पूरी की।
डॉ. महिमा ने भारत और विदेशों में आयोजित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रमों, शोध सम्मेलनों और प्रस्तुतियों में भाग लिया। उनके शोध कार्य और प्रस्तुतियों को विभिन्न मंचों पर सराहा गया तथा उन्हें कई अवसरों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान भी प्राप्त हुए।
छात्राओं और युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
डॉ. महिमा यादव की उपलब्धि उन छात्राओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है, जो उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा आरपीएस स्कूल से पूरी की थी और बारहवीं कक्षा यहीं से उत्तीर्ण की।
यूजीसी ने पांच विश्वविद्यालयों पर लगाया प्रतिबंध
देश में पीएचडी डिग्रियों से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी बड़ा कदम उठाया है। अब तक 92 विश्वविद्यालयों की जांच पूरी की जा चुकी है। जांच में पांच विश्वविद्यालयों में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद यूजीसी ने उन्हें अगले पांच वर्षों तक पीएचडी कार्यक्रम संचालित करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान यदि कोई छात्र इन संस्थानों में पीएचडी में प्रवेश लेता है, तो उसका दाखिला और डिग्री दोनों मान्य नहीं होंगे।

