लखनऊ की 14 वर्षीय आलिया फातिमा ने वैश्विक मंच पर लहराया भारत का परचम, जीता प्रतिष्ठित ‘स्लिंगशॉट चैलेंज 2026’

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कपड़ों के कचरे से बनाई पर्यावरण जागरूकता की अनोखी पहल, 100 देशों के 5,000 से अधिक प्रतिभागियों को पीछे छोड़ हासिल की बड़ी सफलता

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक 14 वर्षीय छात्रा ने अपनी रचनात्मक सोच और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। लखनऊ के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज की कक्षा 9 की छात्रा आलिया फातिमा रिजवी ने नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी और द वॉल्ट डिज्नी कंपनी द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक पर्यावरण प्रतियोगिता ‘स्लिंगशॉट चैलेंज 2026’ में जीत हासिल की है।

आलिया के अभिनव प्रोजेक्ट ने दुनिया भर के पर्यावरण विशेषज्ञों और जजों का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद उन्हें इस वर्ष के विजेताओं में शामिल किया गया।

कपड़ों के बेकार टुकड़ों से तैयार की पर्यावरण संदेश देने वाली कठपुतलियां

आलिया फातिमा रिजवी ने लखनऊ की पारंपरिक कठपुतली कला से प्रेरणा लेकर एक अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया। उन्होंने दर्जियों की दुकानों और कपड़ा मिलों से निकलने वाले बेकार कपड़ों की कतरनों को इकट्ठा कर उन्हें आकर्षक और रंग-बिरंगी हस्तनिर्मित कठपुतलियों में बदल दिया।

इन कठपुतलियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों और समुदायों को रीसाइक्लिंग, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करना है। कहानियों और प्रस्तुति के माध्यम से यह पहल पर्यावरण शिक्षा को सरल और प्रभावी बनाने का प्रयास करती है।

‘द पपेट टीचेस द प्लेनेट’ ने जीता जजों का दिल

आलिया के प्रोजेक्ट का नाम ‘द पपेट टीचेस द प्लेनेट’ (The Puppet Teaches the Planet) है। इस पहल में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

जजों ने प्रोजेक्ट की मौलिकता, सामाजिक प्रभाव और पर्यावरणीय दृष्टिकोण की सराहना की। यही कारण रहा कि हजारों प्रविष्टियों के बीच आलिया का प्रोजेक्ट विजेता चुना गया।

100 देशों के 5,000 प्रतिभागियों के बीच हासिल की जीत

स्लिंगशॉट चैलेंज 2026 में इस बार दुनिया के 100 देशों से 5,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में कुल 2,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट जमा किए गए थे।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आलिया फातिमा रिजवी का प्रोजेक्ट सबसे प्रभावशाली पहलों में शामिल रहा और उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

पुरस्कार में मिलेंगे 1,000 डॉलर और अमेरिका यात्रा का अवसर

इस उपलब्धि के लिए आलिया को 1,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 95 हजार रुपये) का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें अक्टूबर 2026 में अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी जाने का अवसर भी मिलेगा।

वहां उन्हें दुनिया भर के अन्य युवा पर्यावरण नवाचारकर्ताओं के साथ सम्मानित किया जाएगा और अपने विचारों को वैश्विक मंच पर साझा करने का मौका मिलेगा।

क्या है स्लिंगशॉट चैलेंज?

‘स्लिंगशॉट चैलेंज’ की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य 13 से 18 वर्ष की आयु के युवाओं को पर्यावरणीय समस्याओं के व्यावहारिक और रचनात्मक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है।

यह प्रतियोगिता युवाओं को नवाचार, विज्ञान और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रोत्साहित करती है।

युवा सोच से बदल सकती है दुनिया

आलिया फातिमा रिजवी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि बड़े बदलाव की शुरुआत छोटे लेकिन प्रभावशाली विचारों से होती है। उनकी उपलब्धि न केवल लखनऊ और उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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