कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव, फॉर्म-6 और एसआईआर को लेकर सवाल उठाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
नई दिल्ली, 29 सितंबर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। खड़गे ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया गया है और मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी कांग्रेस के कंधों पर है।
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग रखी। ये खड़गे और कांग्रेस की ओर से किए गए राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि आयोग में अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक साल में महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
मतदाता सूची और फॉर्म-6 को लेकर सवाल
खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को भी मुद्दा बनाया और दावा किया कि इससे नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया मुश्किल हुई है।
हाल ही में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इन आपत्तियों में बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताए जाने का उल्लेख था। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम संस्थागत निर्णय से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी के उठाए मुद्दों का भी जिक्र
खड़गे ने राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र से जुड़े मामलों में डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और फॉर्म-6 से संबंधित प्रविष्टियों का मुद्दा उठाए जाने की बात कही।
खड़गे ने दावा किया कि अगर चुनाव आयोग ने इन सवालों पर गंभीरता से ध्यान दिया होता तो उसकी विश्वसनीयता को लेकर मौजूदा विवाद नहीं खड़ा होता।
कांग्रेस ने रखीं पांच मांगें
सीडब्ल्यूसी बैठक में खड़गे ने चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूची में बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, हटाए गए मतदाताओं को सूचना और अपील का अवसर देना तथा राजनीतिक दलों को जरूरी चुनावी डेटा समय पर उपलब्ध कराना शामिल है।
इसके अलावा कांग्रेस ने गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में अधिक पारदर्शिता की मांग की।
चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद का मुद्दा
चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हाल में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची, फॉर्म-6 और चुनाव आयोग की आईटी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा था कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में किए गए महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चुनावी हार-जीत के तौर पर नहीं देखती। उनके मुताबिक चुनाव और सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने का आह्वान किया।

