मनपा चुनावों की घोषणा के साथ ही मुंबई की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खासतौर पर हिंदी भाषी मतदाताओं और उत्तर भारतीय समाज को साधने की कवायद सभी प्रमुख दलों ने शुरू कर दी है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उत्तर भारतीय ओबीसी समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए एक नई और ठोस रणनीति तैयार की है।
🎯 उत्तर भारतीय OBC समाज पर फोकस
शिंदे गुट का मुख्य फोकस मुंबई और महाराष्ट्र में रह रहे उत्तर भारतीय ओबीसी समाज को आरक्षण का लाभ दिलाने पर है। वर्तमान में अन्य राज्यों में ओबीसी का दर्जा रखने के बावजूद, महाराष्ट्र के जटिल नियम-कानूनों के कारण उत्तर भारतीयों को यहां आरक्षण और उससे जुड़ी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
इसी समस्या को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनाते हुए शिंदे गुट इसे चुनावी एजेंडे में शामिल करने की तैयारी में है।
🗣️ एकनाथ शिंदे करेंगे सीधा संवाद
इस मुद्दे के समाधान को लेकर शनिवार को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उत्तर भारतीय ओबीसी समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इसके लिए मुलुंड चेक नाका स्थित होटल टिप-टॉप प्लाजा के सभागृह में एक अहम बैठक आयोजित की गई है।
इस बैठक के आयोजन की जिम्मेदारी संजय निरुपम को सौंपी गई है।
👥 इन समाजों को किया गया आमंत्रित
बैठक में उत्तर भारतीय ओबीसी समाज के अंतर्गत आने वाले
- विश्वकर्मा
- बिंद
- गुप्ता
- चौहान
- निषाद
समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
📊 चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनपा चुनाव से पहले उत्तर भारतीय ओबीसी समाज को साधने की यह पहल मुंबई की राजनीति में बड़ा असर डाल सकती है। यदि आरक्षण और अधिकारों के मुद्दे पर शिंदे गुट भरोसा दिलाने में सफल होता है, तो इसका सीधा असर बीएमसी चुनावों के वोट गणित पर पड़ सकता है।

