मुंबई में मराठी भाषा सीखने को लेकर विवाद अब सड़क पर उतर आया है। मराठी नहीं सीखने को लेकर कथित दबाव और कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को मुंबई के अलग-अलग इलाकों में ऑटो रिक्शा चालक और मालिक प्रदर्शन करते नजर आए। कांदिवली के लोखंडवाला इलाके में ऑटो चालकों ने रिक्शा बंद रखकर विरोध जताया। वहीं, दहानूकरवाड़ी इलाके में भी ऑटो चालकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और अन्य रिक्शा चालकों से भी ऑटो बंद रखने की अपील की।
प्रदर्शन कर रहे हिंदी भाषी ऑटो रिक्शा चालकों का कहना है कि वे पिछले 40-50 वर्षों से मुंबई में ऑटो रिक्शा चला रहे हैं। उनका दावा है कि वे मराठी समझते हैं और कुछ हद तक बोल भी लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद मराठी भाषा को लेकर उन्हें परेशान किया जा रहा है और ऑटो चालकों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की क्या है मांग?
प्रदर्शन कर रहे एक ऑटो रिक्शा चालक ने कहा कि वे दशकों से मुंबई में रहकर ऑटो चला रहे हैं और मराठी समझने के साथ इसे बोलते भी हैं। उनका सवाल है कि मराठी के नाम पर उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भाषा सीखने के नाम पर उनके खिलाफ दबाव या कार्रवाई नहीं की जाए।
ऑटो चालकों का कहना है कि उन्हें सम्मान के साथ काम करने दिया जाना चाहिए। अलग-अलग इलाकों में हुए प्रदर्शनों के चलते स्थानीय स्तर पर ऑटो सेवा प्रभावित होने की खबर है। इस आंदोलन ने मुंबई में भाषा और रोजगार से जुड़े पुराने विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बेसिक मराठी अनिवार्य
महाराष्ट्र सरकार की ओर से कहा गया है कि राज्य में कमर्शियल ऑटो और टैक्सी चलाने वालों के लिए बेसिक मराठी का ज्ञान अनिवार्य है। नए नियमों के मुताबिक, जिन चालकों को मराठी नहीं आती, उन्हें पहले नोटिस देकर भाषा सीखने के लिए समय दिया जाएगा।
निर्धारित समय के भीतर अगर चालक मराठी सीख लेते हैं तो उन पर आगे कार्रवाई नहीं होगी। वहीं, तय समय में मराठी नहीं सीखने पर 3 महीने के लिए उनका ड्राइविंग लाइसेंस और बैज निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर परमिट पूरी तरह रद्द किए जाने का प्रावधान है।

