NEET UG 2026 पेपर लीक: परीक्षा से 3 दिन पहले लीक हुए थे सवाल, WhatsApp-कोचिंग नेटवर्क से छात्रों तक पहुंचा पेपर

Thecity news
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CBI की चार्जशीट में दावा है कि NEET UG 2026 का पेपर परीक्षा से पहले ही कई लोगों तक पहुंच गया था। जांच में NTA से जुड़े विषय विशेषज्ञों, कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और छात्रों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट से कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से तीन दिन पहले ही सवाल लीक हो गए थे और उन्हें व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और ऑफलाइन कक्षाओं के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में एनटीए से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञ, कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और अन्य लोग कथित तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा पाए गए।

सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान ‘NEET 2026’ और ‘FIFA World Cup 2026’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप भी सामने आए, जिनके जरिए कथित तौर पर सवाल और अन्य जानकारी साझा की गई थी।

विषय विशेषज्ञ ने लगाई थी ‘स्पेशल क्लास’

सीबीआई के अनुसार, रसायन विज्ञान के विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में विशेष कक्षाएं आयोजित की थीं। आरोप है कि इन कक्षाओं में शामिल छात्रों को वही सवाल और जवाब लिखवाए गए, जो बाद में नीट परीक्षा में पूछे गए।

लातूर में भी कुछ छात्रों को इसी तरह की विशेष कक्षाएं दिए जाने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, ‘माय गेट’ ऐप के रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से छात्रों के कुलकर्णी के घर पहुंचने की पुष्टि हुई।

छात्रों की नोटबुक में लिखे सवालों और सीबीआई के अनुसार लीक हुए प्रश्नपत्र के बीच भी समानता पाई गई। कुलकर्णी के मोबाइल से रसायन विज्ञान के सवालों की तस्वीरें, उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों से बातचीत समेत कई डिजिटल सबूत मिलने का दावा किया गया है।

व्हाट्सऐप के जरिए आगे भेजे गए सवाल

सीबीआई का कहना है कि परीक्षा के बाद एक अभिभावक ने कुलकर्णी से संपर्क किया और परीक्षा में वही सवाल आने का दावा करते हुए उन्हें घड़ी देने की इच्छा जताई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुलकर्णी ने भौतिक विज्ञान का प्रश्नपत्र हासिल करने की कोशिश की थी।

भौतिक विज्ञान की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार पर गोपनीयता की शपथ के बावजूद 25 हजार रुपये लेकर सवाल लीक करने का आरोप है। जांच के अनुसार परीक्षा से आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे सवाल मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने ये सवाल दूसरे आरोपी तेजस शाह को लिखवाए, जिसने उन्हें आगे पहुंचाया।

मनीषा वाघमारे पर छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी के रूप में काम करने का आरोप है। सीबीआई के मुताबिक, उन्होंने अभिभावकों से चार लाख रुपये तक लेकर छात्रों को ऑफलाइन कक्षाओं में भेजा और पैसे इकट्ठा किए। इसके बाद व्हाट्सऐप के जरिए भौतिक विज्ञान के सवाल भी भेजे गए।

‘FIFA World Cup 2026’ नाम से बनाए गए थे ग्रुप

मनीषा गुरुनाथ मंडारे पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर पर जीव विज्ञान की कक्षा आयोजित की। छात्रों को नई एनसीईआरटी किताबों में कुछ खास पैराग्राफ चिन्हित करवाए गए और सवाल लिखवाए गए। बाद में उन्होंने भौतिक विज्ञान के कथित लीक सवालों की कॉपी भी हासिल की।

सीबीआई के अनुसार, राजस्थान के सीकर में संचालित एक कोचिंग नेटवर्क के जरिए भी कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि 2 मई की रात परीक्षा से पहले एक पीडीएफ फाइल 40 से 50 छात्रों के बीच बांटी गई। एक कोचिंग संचालक ने इसे ‘सबसे संभावित प्रश्नपत्र’ बताकर छात्रों के बीच फैलाया।

जांच में सामने आए व्हाट्सऐप ग्रुपों में ‘NEET 2026’ और ‘FIFA World Cup 2026’ भी शामिल हैं। सीबीआई का दावा है कि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कोड नामों का इस्तेमाल किया। एनटीए के मास्टर सेट के लिए ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ जैसे कोड नाम इस्तेमाल किए गए थे।

अक्टूबर 2025 से शुरू हो गई थी कथित साजिश

चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की कथित साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो गई थी। अक्टूबर 2025 से ही छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किए जाने और किस्तों में लाखों रुपये लिए जाने का दावा किया गया है। कुछ भुगतान नकद और कुछ ऑनलाइन किए गए।

सीबीआई ने प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रक्रिया के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का मौका मिलता था। विशेषज्ञों की पर्याप्त तलाशी नहीं होती थी और पूरे परिसर की निगरानी के लिए अलग नियंत्रण कक्ष भी नहीं था।

सीबीआई का आरोप है कि इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर प्रश्न बाहर ले जाए गए।

लीक सवालों का असली प्रश्नपत्र से हुआ मिलान

जांच में दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जीव विज्ञान के कथित लीक सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से 90 प्रतिशत तक और रसायन विज्ञान के कई सेटों में लगभग 100 प्रतिशत तक मिलान पाया गया।

सीबीआई का कहना है कि 3 मई 2026 को परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद सीकर के एक रसायन विज्ञान शिक्षक ने कथित लीक पीडीएफ और असली प्रश्नपत्र का मिलान किया था। सवालों के मेल खाने के बाद उन्होंने एनटीए के महानिदेशक को ईमेल भेजा। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।

फिलहाल दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई की चार्जशीट पर सुनवाई चल रही है। अदालत अब यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में संज्ञान लिया जाए और आगे मुकदमे की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।

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