2000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर लगेगा MDR? वित्त मंत्री ने साफ किया किससे वसूला जाएगा चार्ज

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निर्मला सीतारमण ने कहा- MDR लागू होने पर इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, बड़े व्यापारियों पर शुल्क लगाने की चर्चा

वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है। विधेयक को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। इसमें मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर से जुड़े प्रावधान की चर्चा है। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि क्या 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाया जाएगा और इसका बोझ किस पर पड़ेगा।

संसद में विधेयक पेश होने के बाद एमडीआर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता तैयार कर रही है। अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर एमडीआर लागू किया जाता है तो इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।

एमडीआर पर वित्त मंत्री ने कांग्रेस को दिया जवाब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार सभी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ कर रही है।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले इस बात पर विचार करना चाहिए कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू की जाती है तो वह केवल व्यापारियों पर लागू होगी, ग्राहकों पर नहीं। उन्होंने कहा कि इसका अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों पर असर नहीं होगा।

वित्त मंत्री के मुताबिक, एमडीआर से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ यूपीआई के सभी उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान लेनदेन को संसाधित करने के लिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य मध्यस्थों को देते हैं।

एमडीआर पर अभी अंतिम फैसला नहीं

निर्मला सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि एमडीआर को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने अभी तक एमडीआर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए जाने के बाद ही होगा। इस विधेयक में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन का प्रस्ताव है।

क्या 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर लगेगा चार्ज?

विधेयक को लेकर सामने आ रही चर्चाओं में 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, वित्त मंत्री के बयान के मुताबिक, यदि एमडीआर लागू भी की जाती है तो इसका भुगतान ग्राहकों को नहीं करना होगा।

इसका मतलब यह है कि किसी ग्राहक द्वारा 2000 रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान किए जाने की स्थिति में सीधे ग्राहक से एमडीआर वसूलने का प्रस्ताव नहीं है। शुल्क लागू होने की स्थिति में इसका असर संबंधित व्यापारियों पर पड़ेगा।

बड़े व्यापारियों पर एमडीआर लगाने की चर्चा

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया है कि प्रस्ताव का उद्देश्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं या छोटे व्यापारियों को प्रभावित करना नहीं है। चर्चा में मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों पर एमडीआर लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

इनमें प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां और निर्धारित सालाना कारोबार सीमा से अधिक कारोबार करने वाले व्यवसाय शामिल हो सकते हैं। छोटे मूल्य के लेनदेन और व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई भुगतान प्रस्तावित ढांचे से बाहर रहने की उम्मीद है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यूपीआई पर एमडीआर को दोबारा लागू करने को लेकर करीब दो वर्षों से चर्चा चल रही है। हालांकि, अंतिम फैसला अभी लिया जाना बाकी है।

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