ऑल इंडिया रैंक 1 आर्यन गुप्ता और रैंक 2 पंशुल बंसल ने साझा किया अनुभव, कहा- मुश्किल समय में तैयारी नहीं छोड़ी
NEET UG 2026 पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले आर्यन गुप्ता और रैंक 2 पर रहे पंशुल बंसल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। दोनों छात्रों ने कहा कि पेपर रद्द होने से वे निराश जरूर हुए, लेकिन उन्होंने अपना पूरा ध्यान दोबारा परीक्षा की तैयारी पर केंद्रित रखा।
पेपर रद्द होने पर खूब रोया, फिर पढ़ाई शुरू की: आर्यन
आर्यन गुप्ता ने बताया कि परीक्षा रद्द होने की खबर उनके लिए बेहद दुखद थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह काफी निराश हुए और रोए भी, लेकिन जल्द ही उन्होंने खुद को संभालते हुए दोबारा तैयारी शुरू कर दी। आर्यन ने कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ वही नहीं, बल्कि करीब 22 लाख अभ्यर्थी इस स्थिति से गुजर रहे हैं। उन्होंने इसे दूसरा मौका मानकर अगले ही दिन से पढ़ाई शुरू कर दी।
‘प्रदर्शन के बजाय पढ़ाई चुनी’
ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करने वाले पंशुल बंसल ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना बेहतर समझा। उनके मुताबिक उन्होंने अपना रूटीन नहीं बदला और पूरी मेहनत के साथ तैयारी जारी रखी। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाया और बाकी सब भगवान पर छोड़ दिया।
परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
आर्यन गुप्ता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बड़े भाई और शिक्षकों को दिया। उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थिसियोलॉजिस्ट हैं, जबकि मां डॉ. रेनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं। उनके बड़े भाई मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), दिल्ली में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत
आर्यन ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों। उनका कहना था कि हर व्यवस्था में कमियां होती हैं, लेकिन उन्हें दूर करना जरूरी है।
पढ़ाई पर फोकस का मिला परिणाम
दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल बंसल ने कहा कि उन्होंने पूरे समय अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित रखा। उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय पढ़ाई करना सही फैसला साबित हुआ और उसी का परिणाम आज उनकी सफलता के रूप में सामने है।

