इलॉन मस्क की कंपनी ने कहा कि वह भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए तैयार है। वहीं, रिलायंस ने सभी कंपनियों के लिए समान नियमों का पालन जरूरी बताया है।
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर स्टारलिंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। रिलायंस की ओर से इलॉन मस्क के आरोपों का खंडन किए जाने के बाद स्टारलिंक ने कहा है कि वह भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए तैयार है। कंपनी के मुताबिक, उसने भारत में जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने और नियामकों के साथ काम करने में पांच साल से अधिक समय बिताया है।
स्टारलिंक ने क्या कहा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के बयान के बाद स्टारलिंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी तैयारी को लेकर जानकारी दी। कंपनी ने कहा कि उसने भारत में नियामकों, उद्योग जगत और सेवा प्रदाताओं के साथ पांच साल से अधिक समय तक काम किया है।
कंपनी के मुताबिक, उसने भारत में समर्पित सिस्टम, गेटवे और अन्य बुनियादी ढांचे का नेटवर्क तैयार किया है, ताकि भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से सेवाएं दी जा सकें। स्टारलिंक ने यह भी कहा कि उसका बुनियादी ढांचा जरूरी सरकारी मंजूरियों के साथ तैयार किया गया है।
रिलायंस ने मस्क के आरोपों का किया खंडन
स्टारलिंक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि कुछ कारोबारी समूह भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, लेकिन सभी कंपनियों को भारतीय कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार भारतीय और विदेशी कंपनियों के लिए समान प्रक्रिया अपनाने की बात कह चुकी है।
रिलायंस के मुताबिक, जियो की अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भी अभी आवश्यक मंजूरियों का इंतजार है। कंपनी ने कहा कि भारत में कारोबार और निवेश के लिए खुला माहौल कानून के शासन पर आधारित है।
जियो को भी मंजूरियों का इंतजार
सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में रिलायंस जियो भी अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, कंपनी को अपनी सैटेलाइट सेवा के लिए जरूरी मंजूरियां अभी नहीं मिली हैं।
इस क्षेत्र में स्टारलिंक, रिलायंस जियो और यूटेलसैट वनवेब को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं देने के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं। इन सेवाओं के जरिए दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की उम्मीद है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित करना मुश्किल है।
अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर भी भारत में इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
सरकार ने भी मस्क के दावों को किया खारिज
केंद्र सरकार भी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं और स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन राजस्व-साझाकरण व्यवस्था को अंतिम रूप देने और कंपनियों की ओर से सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी किए जाने के बाद ही किया जाएगा।
ऐसे में भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ अन्य नियामकीय और सुरक्षा संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

