दुनियाभर के शेयर बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। बुधवार, 11 जून को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 367 अंकों की गिरावट के साथ 73,615 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 110 अंक टूटकर 23,104 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार खुलने से पहले ही संकेत मिल गए थे कि निवेशकों का रुख कमजोर रह सकता है। गिफ्ट निफ्टी 71.1 अंक गिरकर 23,169 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जिससे घरेलू बाजार में दबाव की आशंका जताई जा रही थी।
ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे प्रमुख वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता के कारण एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई दर दर्ज होने से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को लेकर भी चिंताएं गहरा गई हैं।
एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली
ईरान-अमेरिका तनाव का असर एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। एमएससीआई एशिया-पैसिफिक इंडेक्स में 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई 225 भी लगभग 2 प्रतिशत लुढ़क गया।
इन बाजारों में आई गिरावट ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 953 अंक टूटकर 49,918 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 इंडेक्स में 1.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता अमेरिकी बाजारों में दबाव बनाए हुए है, जिसका असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका द्वारा ईरान में कुछ ठिकानों पर नए हमलों और ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत चढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई फेड की चुनौती
मई महीने में अमेरिकी महंगाई दर अप्रैल 2023 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ती नजर आई। इससे यह संभावना मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।
ऊंची ब्याज दरें वैश्विक बाजारों से निवेश निकासी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों में कमजोरी का कारण बन सकती हैं।
ओरेकल के नतीजों के बावजूद निवेशकों में चिंता
दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए। कंपनी का राजस्व 19.18 अरब डॉलर रहा, जबकि प्रति शेयर आय 2.03 डॉलर दर्ज की गई।
हालांकि कंपनी की 40 अरब डॉलर जुटाने और 70 अरब डॉलर के बड़े पूंजीगत निवेश की योजना ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। इसके चलते आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में ओरेकल का शेयर 10.2 प्रतिशत गिरकर 201.26 डॉलर तक पहुंच गया।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करेंगी। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और उतार-चढ़ाव वाले बाजार में सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

