सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी और जल्दबाजी में इसे नहीं सुना जाएगा।
CBI जांच और SIT गठन की मांग वाली याचिका
यह याचिका वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई थी। इसमें मांग की गई है कि मामले में FIR दर्ज की जाए और सीबीआई की निगरानी में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय गतिविधियों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
SIT जांच पर प्रक्रिया को लेकर सवाल
याचिका में यह भी दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने बिना किसी औपचारिक आपराधिक FIR दर्ज किए जांच शुरू कर दी, जो प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि 13 जून को चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने SIT का गठन किया था, जिसने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, जल्दबाजी पर सवाल
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं से पूछा कि मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अदालत ने कहा कि इसे गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित कार्य दिवसों में सुना जाना उचित होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं दिखती।
तत्काल सुनवाई की मांग खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए निर्देश दिया कि याचिका पर 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में विचार किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि आरोप गंभीर हैं और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
पुलिस जांच और ट्रस्ट से जुड़े बयान दर्ज
अब तक इस मामले में पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है। ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बयान भी आगे दर्ज किए जा सकते हैं।
चंपत राय ने हाल ही में ट्रस्ट से इस्तीफा भी दे दिया है।

