तिरुनेलवेली में बिरयानी की दुकान के बाहर भगवान गणेश की तस्वीर वाला बैनर लगाने पर विवाद, स्थानीय बिल्डर की शिकायत के बाद पुलिस ने बैनर हटाया और दुकानदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में भगवान गणेश की तस्वीर वाले बैनर के जरिए बिरयानी का प्रचार करना एक दुकानदार को भारी पड़ गया। दुकान के बाहर लगाए गए बैनर को लेकर स्थानीय लोगों ने धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत की और विरोध जताया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैनर तुरंत हटवा दिया और दुकान के मालिक जयंत के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
स्थानीय बिल्डर ने दर्ज कराई शिकायत
मामला तिरुनेलवेली के वीएम चत्रम इलाके का है। यहां ‘डिंडिगुल कल्याणा बिरयानी’ दुकान के सामने भगवान गणेश की तस्वीर वाला एक बैनर लगाया गया था।
स्थानीय बिल्डर सेल्वराज की नजर जब इस बैनर पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। उनका आरोप था कि बैनर में हिंदुओं के पूजनीय भगवान गणेश की तस्वीर का इस्तेमाल इस तरह किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
सेल्वराज ने सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने जांच के बाद दुकानदार को किया गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बैनर लगाने के पीछे की वजह और उसके मकसद समेत कई पहलुओं की पड़ताल की।
जांच के बाद पुलिस ने बिरयानी दुकान के मालिक जयंत, उम्र 30 वर्ष, को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने दुकान के बाहर लगे विवादित बैनर को भी हटा दिया।
चेहल्लुम पर बिरयानी बांटने के दौरान हुई थी छीना-झपटी
इससे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर से भी बिरयानी से जुड़ा एक मामला सामने आया था। अगस्त में बिल्हौर थाना क्षेत्र के मकनपुर दरगाह शरीफ में चेहल्लुम के दौरान ताजिए ठंडे किए जाने के बीच बिरयानी बांटने को लेकर भारी भीड़ जुट गई थी।
बिरयानी लेने के लिए लोगों में छीना-झपटी शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर वितरण करने वाले ताजिए कार्यकर्ता मौके से हट गए और भीड़ ने स्टैंड पर रखी बिरयानी की पूरी डेग जमीन पर गिरा दी। इसके बाद लोग बिरयानी लेने के लिए टूट पड़े।
इस दौरान कई लोगों के कपड़े गंदे हो गए और छीना-झपटी में कुछ युवकों को नाखून लगने से खरोंचें भी आई थीं। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
चेहल्लुम को अरबी में ‘अरबाईन’ कहा जाता है, जिसका फारसी में अर्थ ‘चालीसवां’ होता है। यह मुहर्रम में करबला की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के करीब 40 दिन बाद, सफर महीने की 20 तारीख को मनाया जाता है।

