UPI MDR Row: संसद की वित्त समिति की सिफारिश पर घमासान, कांग्रेस सांसद बोले- मौजूदा शुल्क पर नहीं हुई थी चर्चा

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सरकार का दावा- पांच कांग्रेस सांसदों की मौजूदगी में UPI के लिए टियर-आधारित राजस्व मॉडल की सिफारिश हुई; विपक्ष का पलटवार- 0.4% शुल्क, दर और सीमा जैसे मुद्दे समिति के सामने नहीं रखे गए

यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किए जाने को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों तक पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि समिति ने यूपीआई के लिए एक टियर-आधारित एमडीआर और राजस्व मॉडल की जरूरत बताई थी और रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के दौरान कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे। सरकार के मुताबिक, प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की ओर से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की गई।

वहीं, कांग्रेस सांसदों का कहना है कि समिति ने यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत पर चर्चा जरूर की थी, लेकिन मौजूदा 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्ताव पर समिति में चर्चा नहीं हुई थी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने कहा है कि शुल्क की दर, रकम, अधिकतम सीमा और छूट जैसे विशिष्ट प्रावधान समिति के सामने नहीं रखे गए थे।

सरकार ने समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला

सरकारी सूत्रों ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 44वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में यूपीआई के लिए एक स्तरीय राजस्व मॉडल तैयार करने और उसे जल्द लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया था।

सरकार के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को रिपोर्ट को अपनाए जाने के समय कांग्रेस के पांच सांसद पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ बैठक में मौजूद थे। सरकार का कहना है कि प्रकाशित कार्यवाही में इनकी ओर से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं है।

समिति ने अपने अवलोकन में यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट में वित्तीय सेवा विभाग से आत्मनिर्भर टियर-आधारित राजस्व मॉडल तलाशने की बात कही गई थी।

कांग्रेस सांसदों ने सरकार के दावे को खारिज किया

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के इस दावे को खारिज किया है कि समिति ने मौजूदा यूपीआई शुल्क व्यवस्था का समर्थन किया था। उनका कहना है कि समिति के सामने हाल में घोषित विशिष्ट एमडीआर प्रस्ताव रखा ही नहीं गया था।

गोगोई के मुताबिक, वित्तीय सेवा विभाग जब समिति के सामने आया था, तब यूपीआई पर इस तरह के किसी खास शुल्क का प्रस्ताव मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि एमडीआर की जरूरत को लेकर समिति में सवाल जरूर उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

दर और शुल्क की सीमा पर चर्चा नहीं हुई: मनीष तिवारी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सरकार की व्याख्या पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि समिति के सामने एमडीआर की दर, शुल्क की रकम, अधिकतम सीमा और छूट के स्लैब से जुड़ा कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया था।

तिवारी के मुताबिक, समिति की बैठकों में एमडीआर और यूपीआई के लिए राजस्व मॉडल की जरूरत को लेकर सदस्यों ने सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि समिति की गोपनीय कार्यवाही को इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए जिससे यह लगे कि सांसदों ने मौजूदा शुल्क व्यवस्था का समर्थन किया था।

इस तरह विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह है कि समिति की रिपोर्ट में टियर-आधारित राजस्व मॉडल की सिफारिश और बाद में लागू किए गए विशिष्ट 0.4 प्रतिशत एमडीआर ढांचे को एक ही बात माना जाए या दोनों को अलग-अलग देखा जाए।

राहुल गांधी ने बताया ‘यूपीआई टैक्स’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नए शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए इसे ‘यूपीआई टैक्स’ बताया है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है।

सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि नया एमडीआर ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है और इसका उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था के लिए लंबे समय में टिकाऊ वित्तीय ढांचा तैयार करना है। सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों से भी इनकार किया है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया एमडीआर

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के संशोधित ढांचे के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू होगा। 2,000 रुपये तक के लेनदेन और पर्सन-टू-पर्सन यानी पी2पी भुगतान इस शुल्क से बाहर रहेंगे।

2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर सामान्य एमडीआर 0.4 प्रतिशत होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है, जबकि छोटे कारोबारियों के लिए भी छूट का प्रावधान है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

विवाद अब समिति की रिपोर्ट और नए शुल्क के बीच

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग सवाल सामने आ रहे हैं। पहला, क्या संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए टिकाऊ और टियर-आधारित राजस्व मॉडल की सिफारिश की थी। दूसरा, क्या 15 अक्टूबर से लागू होने वाले मौजूदा 0.4 प्रतिशत एमडीआर के विशिष्ट प्रावधान समिति के सामने रखे गए थे।

सरकार पहले सवाल के आधार पर अपने फैसले का बचाव कर रही है, जबकि कांग्रेस सांसद दूसरे सवाल पर जोर देते हुए कह रहे हैं कि समिति की सिफारिश को मौजूदा शुल्क ढांचे के समर्थन के तौर पर पेश करना सही नहीं है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच विवाद का केंद्र अब संसद की समिति की रिपोर्ट और उसके बाद तैयार किए गए एमडीआर ढांचे के संबंध पर है।

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