कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा- मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों के वोट बंटे हुए हैं, इसी वजह से सत्तापक्ष को फायदा मिल रहा है; कांग्रेस और वाम संगठनों की रणनीति पर भी उठाए सवाल
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव 2026 के नतीजों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि डूसू चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादातर छात्र मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ हैं, लेकिन वोट बंटने की वजह से इसका फायदा सत्तापक्ष को मिला।
दास ने यह भी कहा कि चुनाव जीतकर पद हासिल करने वाले उम्मीदवारों को यह याद रखना चाहिए कि वे “राजा या रानी” नहीं हैं। उनके मुताबिक, विजेता उम्मीदवारों को बहुमत का समर्थन नहीं मिला है। यह दास का राजनीतिक आकलन है, न कि डूसू के आधिकारिक चुनाव परिणामों का निष्कर्ष।
सौरव दास ने क्या कहा?
सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि डूसू के नतीजों से दो बातें सामने आती हैं। उनके मुताबिक, अधिकांश छात्र मौजूदा सरकार के खिलाफ हैं, लेकिन वे अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए हैं और इसका फायदा सरकार को मिल रहा है।
उन्होंने चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों को लेकर कहा कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वे राजा या रानी नहीं हैं और बहुमत ने उन्हें वोट नहीं दिया है।
दास ने यह भी कहा कि केवल एक छात्र संघ चुनाव के नतीजे के आधार पर करोड़ों युवाओं के राजनीतिक रुझान का आकलन करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की स्थिति, महंगाई और युवाओं में निराशा जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन व्यापक मुद्दों को भी राजनीतिक विश्लेषण में शामिल किया जाना चाहिए।
कांग्रेस और वाम संगठनों पर भी साधा निशाना
सौरव दास ने कांग्रेस की रणनीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को CJP पर ध्यान देने के बजाय अपनी रणनीति पर काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों से अपनाई जा रही रणनीति को लेकर लोगों में धैर्य कम हो रहा है।
उन्होंने NSUI के बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। दास ने कुछ वामपंथी संगठनों पर भी वैचारिक शुद्धता और अलग पहचान पर ज्यादा जोर देने का आरोप लगाया और विपक्षी एकता के तरीके पर सवाल उठाए। ये दावे दास के राजनीतिक बयान हैं।
डूसू में एबीवीपी ने जीते तीन पद
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की।
अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले और उन्होंने एबीवीपी के ईशु मौर्य को 13,705 वोटों के अंतर से हराया।
NSUI चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी पद नहीं जीत सकी। चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 प्रतिशत रहा।
दीपांशु शौकीन की जीत भी चर्चा में
डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत खास तौर पर चर्चा में रही। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और एबीवीपी तथा NSUI के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।
शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे और पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे।

