
नई दिल्ली/मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है।
एजेंसी ने मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक आवास, दिल्ली के रिलायंस सेंटर समेत 8 शहरों में 40 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत ₹3,084 करोड़ रुपये बताई गई है।
📜 मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत कार्रवाई
ईडी की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, यह कुर्की 31 अक्टूबर 2025 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।
यह कार्रवाई उन वित्तीय लेनदेन से जुड़ी है जिनमें रिलायंस समूह की कंपनियों पर लोन राशि के दुरुपयोग का आरोप है।
🏦 क्या है पूरा मामला?
ईडी के अनुसार, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ₹12,524 करोड़ का लोन लिया था।
इनमें से अधिकांश राशि रिलायंस समूह से जुड़ी अन्य कंपनियों को ट्रांसफर की गई। जांच में पाया गया कि ₹6,931 करोड़ रुपये के लोन NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) घोषित हो चुके हैं।
🔍 कैसे हुआ खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया कि लोन की बड़ी रकम को कंपनी के निदेशकों और संबद्ध इकाइयों के माध्यम से घुमाकर वापस रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों में भेज दिया गया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।
🏠 किन संपत्तियों पर गिरी ईडी की नजर
ईडी ने जो संपत्तियां कुर्क की हैं, उनमें—
- मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक आवास
- दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर
- और 8 शहरों में वाणिज्यिक एवं आवासीय संपत्तियां शामिल हैं।
संपत्तियों की कुल बाजार कीमत ₹3,084 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।
⚠️ आगे की जांच जारी
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि लोन राशि को किन चैनलों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया और इससे किसे लाभ हुआ।
ईडी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अनिल अंबानी समेत शीर्ष अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

