भारत ने समुद्री उद्योग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जहाजों की रीसाइक्लिंग (शिप रीसाइक्लिंग) में दुनिया का शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 35.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो दुनिया के किसी भी देश से अधिक है। वर्ष 2025 में भारत ने 29.9 लाख ग्रॉस टन और 2024 में 18.6 लाख ग्रॉस टन जहाजों की रीसाइक्लिंग की थी। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक समुद्री उद्योग और हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।
क्या होती है जहाजों की रीसाइक्लिंग?
जहाज रीसाइक्लिंग या शिप ब्रेकिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें पुराने और सेवा से बाहर हो चुके जहाजों को सुरक्षित तरीके से तोड़कर उनके उपयोगी हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है। इसमें जहाज के स्टील, इंजन, विद्युत उपकरण, फर्नीचर और अन्य सामग्रियों को अलग-अलग करके पुनः बाजार में उपयोग के लिए भेजा जाता है।
यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल और जोखिमपूर्ण होती है क्योंकि इसमें पर्यावरण संरक्षण और श्रमिक सुरक्षा दोनों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
🖼️ प्रतिनिधि तस्वीर: अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड, गुजरात
कब की जाती है जहाजों की रीसाइक्लिंग?
आमतौर पर किसी जहाज की परिचालन आयु 25 से 30 वर्ष मानी जाती है। जब उसका संचालन अत्यधिक महंगा, असुरक्षित या तकनीकी रूप से अप्रभावी हो जाता है, तब शिपिंग कंपनियां उसे सेवा से बाहर कर देती हैं। इसके बाद जहाज को रीसाइक्लिंग यार्ड में भेजा जाता है, जहां उसके उपयोगी संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाया जाता है।
कैसे होती है शिप रीसाइक्लिंग? जानिए पूरी प्रक्रिया
1. जहाज को किनारे लाना
सबसे पहले पुराने जहाज को समुद्र से खींचकर तट पर लाया जाता है, जहां उसे सुरक्षित रूप से स्थिर किया जाता है।
2. खतरनाक पदार्थों को हटाना
जहाज के अंदर मौजूद तेल, डीजल, रसायन और अन्य खतरनाक पदार्थों को सावधानीपूर्वक निकाला जाता है ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
3. जहाज की कटाई
प्रशिक्षित मजदूर और विशेषज्ञ गैस कटर जैसी तकनीकों की मदद से जहाज को छोटे-छोटे हिस्सों में काटते हैं।
4. सामग्री का वर्गीकरण
कटाई के बाद स्टील और धातुओं को स्टील प्लांट्स में भेजा जाता है, जबकि अन्य उपयोगी उपकरणों और फर्नीचर को बाजार में बेचा जाता है।
भारत कैसे बना शिप रीसाइक्लिंग का किंग?
भारत की सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिन्होंने उसे वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग उद्योग का केंद्र बना दिया है।
अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड की बड़ी भूमिका
Alang Ship Breaking Yard दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग केंद्र माना जाता है। यहां 150 से अधिक सक्रिय यार्ड संचालित हैं, जहां हर साल सैकड़ों जहाजों को रीसाइक्लिंग के लिए लाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन
भारत ने हॉन्ग कॉन्ग कन्वेंशन के अनुरूप पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित शिप रीसाइक्लिंग व्यवस्था विकसित की है। हाल के वर्षों में यार्डों के आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है।
कुशल और किफायती श्रमशक्ति
भारत के पास प्रशिक्षित और अपेक्षाकृत कम लागत वाला श्रमिक बल है, जो इस उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है।
स्टील की बढ़ती मांग
देश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और निर्माण गतिविधियों के चलते स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि जहाजों की रीसाइक्लिंग से मिलने वाला स्टील भारत की कुल जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करता है।
मजबूत कानूनी ढांचा
शिप रीसाइक्लिंग अधिनियम, 2019 ने उद्योग को कानूनी मजबूती प्रदान की है, जिससे विदेशी जहाज मालिकों का विश्वास बढ़ा है।
पर्यावरण और रोजगार दोनों को फायदा
जहाज रीसाइक्लिंग केवल स्टील उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह उद्योग हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। गुजरात के अलंग सहित कई क्षेत्रों में हजारों परिवारों की आजीविका इसी उद्योग पर निर्भर है।
साथ ही, यह प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों की बचत करती है क्योंकि पुराने स्टील का पुनः उपयोग नए लौह अयस्क के खनन की तुलना में कम खर्चीला और कम प्रदूषणकारी होता है।
दुनिया के टॉप-5 शिप रीसाइक्लिंग देश
| रैंक | देश | अनुमानित वैश्विक हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| 1 | भारत | 30-35% |
| 2 | बांग्लादेश | 25-28% |
| 3 | पाकिस्तान | 15-18% |
| 4 | तुर्की | 7-10% |
| 5 | चीन | 3-5% |
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
शिप रीसाइक्लिंग उद्योग के सामने आने वाले वर्षों में कई नई चुनौतियां होंगी:
- इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाले जहाजों की रीसाइक्लिंग
- पर्यावरणीय मानकों को और सख्त बनाना
- आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग
- श्रमिक सुरक्षा को और मजबूत करना
हालांकि अवसर भी कम नहीं हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में दुनिया भर में 16,000 से अधिक जहाज सेवा से बाहर होंगे। भारत वर्तमान में सालाना 500 से 600 जहाजों की रीसाइक्लिंग क्षमता रखता है और सरकार इसे और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
भारत की सफलता क्यों है खास?
जहाज रीसाइक्लिंग सर्कुलर इकॉनमी का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां पुराने संसाधनों को नए आर्थिक मूल्य में बदला जाता है। इस क्षेत्र में दुनिया में नंबर-1 बनना भारत के लिए केवल औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हरित अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक समुद्री व्यापार में बढ़ती ताकत का प्रतीक भी है।

