राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ, सरकारी विभागों से लेकर नगर निगम, विश्वविद्यालय और सहायता प्राप्त संस्थानों की सीधी भर्ती में लागू होगा समानांतर आरक्षण
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में मेधावी खिलाड़ियों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की नीति में बदलाव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संशोधित नीति को मंजूरी दी गई। नई नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नौकरी के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है।
सरकार के मुताबिक, पात्र खिलाड़ियों को अपने खेल प्रमाणपत्र का सत्यापन नए सरकारी आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा। नई नीति लागू होने के बाद इस संबंध में जारी पहले के सभी सरकारी आदेश रद्द माने जाएंगे और सरकार संशोधित नियमों की विस्तृत जानकारी वाला नया शासनादेश जारी करेगी।
कहां लागू होगा 5 प्रतिशत आरक्षण?
यह 5 प्रतिशत समानांतर आरक्षण राज्य सरकार के विभागों और जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, नगर निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों में सीधी भर्ती के लिए लागू होगा।
इसके अलावा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, आश्रम स्कूलों, सहकारी संस्थाओं, बैंकों, चीनी मिलों और राज्य से आर्थिक सहायता प्राप्त स्वैच्छिक संगठनों की ग्रुप ए, बी, सी और डी की नौकरियां भी इसके दायरे में आएंगी।
किन खिलाड़ियों को मिलेगा आरक्षण का लाभ?
नई नीति के तहत 2005 के बाद लगातार कम से कम तीन समर ओलंपिक में शामिल रहे खेलों को पात्र माना गया है। महाराष्ट्र के पारंपरिक और क्षेत्रीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी, खो-खो, शतरंज, मल्लखंब और क्रिकेट को भी पात्र खेलों की सूची में शामिल किया गया है।
हालांकि, ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजनों के लिए तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी। इन आयोजनों में संबंधित वर्ष में शामिल कोई भी खेल पात्र माना जाएगा।
मान्यता प्राप्त खेल संघों की सीनियर, यूथ और जूनियर प्रतियोगिताओं के पदक विजेता भी आरक्षण के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा स्कूल गेम्स अंडर-19, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी और पैरा गेम्स तथा ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के पदक विजेताओं को भी लाभ मिलेगा।
फर्जी प्रमाणपत्र रोकने के लिए डिजिटल सिस्टम
सरकार ने फर्जी खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के लिए डिजिटल ‘स्पोर्ट्स ई-सर्टिफिकेट ऑटोमेशन सिस्टम’ शुरू करने का फैसला किया है। प्रतियोगिता आयोजकों को टूर्नामेंट खत्म होने के सात दिनों के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ खिलाड़ियों के परिणाम इस सिस्टम पर अपलोड करने होंगे।
रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए सिस्टम में ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रिकॉर्ड में बदलाव या छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग के जरिए प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहले से पात्र उम्मीदवारों को भी नए सरकारी आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने खेल प्रमाणपत्र का सत्यापन कराना होगा।
ये खेल नई नीति में शामिल
नई नीति में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, कैनोइंग, कायाकिंग, क्रिकेट, साइकिलिंग, फेंसिंग, फुटबॉल, जिम्नास्टिक्स, हैंडबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, मल्लखंब, रोइंग, रग्बी, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, ट्रायथलॉन, वॉलीबॉल, मॉडर्न पेंटाथलॉन, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग, स्पोर्ट क्लाइंबिंग, गोल्फ, शतरंज, घुड़सवारी, सेलिंग और टेनिस समेत कई खेल शामिल हैं।

