राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की वकालत, बोले- देश की 30% आबादी जेन-जी की, लेकिन प्रतिनिधित्व 1% से भी कम
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल करने की वकालत की है। उनका कहना है कि राजनीति में युवाओं के प्रतिनिधित्व की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह संबंधित लोगों से बातचीत भी करेंगे।
21 साल उम्र सीमा पर दिया जोर
रेवंत रेड्डी ने कहा कि जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, सिंगापुर समेत कई देशों में मतदान की उम्र 21 साल है। उन्होंने कहा कि पहले भारत में भी मतदान की उम्र 21 वर्ष थी और विधानसभा व लोकसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष थी। बाद में मतदान की आयु 18 वर्ष कर दी गई, ऐसे में अब चुनाव लड़ने की आयु सीमा पर भी पुनर्विचार करने का समय आ गया है।
विधानसभा और लोकसभा में युवाओं को मिले मौका
आईएएनएस से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 21 वर्ष की आयु में युवाओं को आईएएस, आईपीएस और अन्य सिविल सेवाओं में नियुक्त किया जा सकता है, साथ ही वे मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष बन सकते हैं, तो उन्हें विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को विधायक, सांसद, राज्य मंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने के भी समान अवसर मिलने चाहिए।
30% आबादी, लेकिन प्रतिनिधित्व 1% से भी कम
रेवंत रेड्डी ने कहा कि भारत की लगभग 30 प्रतिशत आबादी जेन-जी की है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को विभिन्न स्तरों पर उठाएंगे और संबंधित पक्षों से चर्चा करेंगे, ताकि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिल सके और उन्हें देश के विकास में अधिक भागीदारी मिले।
नए शिक्षा मंत्री से जताई उम्मीद
मुख्यमंत्री ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को बधाई देते हुए कहा कि वह उन्हें लंबे समय से जानते हैं और उम्मीद है कि वे शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने नए शिक्षा मंत्री को युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान देने का भी आग्रह किया है।

