NEET UG 2026: चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, नई व्यवस्था से होगी काउंसलिंग

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लखनऊ बेंच ने एससी के लिए 21%, एसटी के लिए 2% और ओबीसी के लिए 27% आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग की दी अनुमति, दाखिले अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को नीट-यूजी के तहत एमबीबीएस दाखिले में चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने राज्य सरकार को इन कॉलेजों में अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप काउंसलिंग आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।

अब इन चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग की जा सकेगी। हालांकि, काउंसलिंग और उसके आधार पर होने वाले सभी दाखिले हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे।

पिछले साल सरकार ने दिया था आश्वासन

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पिछले वर्ष सरकार की ओर से अदालत के समक्ष आश्वासन दिया गया था कि अगले शैक्षणिक सत्र से आरक्षण व्यवस्था को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा।

अदालत ने इसी कथित आश्वासन के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। न्यायालय ने पूछा है कि उक्त अंडरटेकिंग के कथित उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

चार मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की व्यवस्था

  • एससी: 21 प्रतिशत
  • एसटी: 2 प्रतिशत
  • ओबीसी: 27 प्रतिशत

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इन आरक्षण प्रावधानों के आधार पर काउंसलिंग आगे बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि, इससे होने वाले दाखिलों का अंतिम फैसला अदालत के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।

तकनीकी सहायक भर्ती में महिला आरक्षण को चुनौती खारिज

इसी बीच, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने तकनीकी सहायक समूह-ग के 3,446 पदों पर भर्ती में महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने योगेंद्र सिंह सोलंकी और एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 4 मार्च 2024 की विज्ञप्ति में दिए गए उस प्रावधान को चुनौती दी थी, जिसके तहत महिला अभ्यर्थियों को उनकी संबंधित श्रेणी में समायोजित करने की व्यवस्था की गई थी।

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