साढ़े सात साल बाद शुरू हुई सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को 60 साल की उम्र तक आवेदन का मौका, लेकिन विज्ञापन में अनुभव के आधार पर भारांक का जिक्र नहीं
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में साढ़े सात साल बाद शुरू हुई 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती से प्रदेश के करीब 1.42 लाख शिक्षामित्रों को निराशा हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी भर्ती विज्ञापन में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की उम्र यानी 60 साल तक आवेदन के लिए पात्र माना गया है, लेकिन अनुभव के आधार पर दिए जाने वाले भारांक का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि पिछली शिक्षक भर्तियों की तरह इस बार भी उन्हें सेवा और अनुभव के आधार पर वेटेज मिलेगा। हालांकि, भर्ती विज्ञापन में इसका प्रावधान नहीं होने से शिक्षामित्रों के बीच असंतोष है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारांक की उम्मीद
राम शरण मौर्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर दिया जाए। शीर्ष अदालत ने यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था कि शिक्षामित्र इस अवसर का लाभ किस प्रकार और किन प्रक्रियाओं या व्यवस्थाओं के तहत उठा सकेंगे।
वहीं, 69 हजार शिक्षक भर्ती के कटऑफ विवाद से जुड़े मामले में राज्य सरकार ने 12 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन में कहा था कि उस समय शिक्षकों के रिक्त 51,112 पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
पिछली भर्तियों में मिला था 10 से 25 अंक तक भारांक
जुलाई 2017 में बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किए गए 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद रिक्त पदों को भरने के लिए हुई 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर 10 से 25 अंक तक का भारांक दिया गया था।
इन भर्तियों के बाद शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि 11,508 पदों वाली मौजूदा भर्ती में भी उन्हें अनुभव के आधार पर वेटेज दिया जाएगा। लेकिन विज्ञापन में भारांक का प्रावधान नहीं होने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
शिक्षामित्र संघ ने उठाई भारांक की मांग
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि 26 वर्षों की सेवा के बाद शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक नहीं देना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने सरकार से इस भर्ती में शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर वेटेज देने की मांग की है।
अब तक करीब 15 हजार शिक्षामित्रों को मिली शिक्षक की नौकरी
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2017 में समायोजन निरस्त किए जाने के बाद हुई 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्तियों में शिक्षामित्रों को भारांक दिया गया था। इन दोनों भर्तियों में क्रमशः करीब 7 हजार और 8 हजार शिक्षामित्रों को ही सहायक अध्यापक की नौकरी मिल सकी।
वहीं, अब तक 90 हजार से अधिक शिक्षामित्र टीईटी पास कर चुके हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि वे लंबे समय से शिक्षक पद के अनुरूप काम कर रहे हैं और एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार सहायक अध्यापक पद की न्यूनतम अर्हता रखते हैं। ऐसे में वे सरकार से उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने की मांग कर रहे हैं।

