होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे एनर्जी कंपनियों के शेयर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, जबकि टेक शेयरों समेत व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर गहराते तनाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार जारी उथल-पुथल से कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
महंगे कच्चे तेल ने जहां वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंता पैदा कर दी है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए यह स्थिति फायदे का सौदा साबित हो रही है। मंगलवार को ऊर्जा शेयरों ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, जबकि व्यापक शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया।
एनर्जी शेयरों में तूफानी तेजी का कारण
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएंडपी 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स 1.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर अपने इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले मार्च में इसने रिकॉर्ड बनाया था।
जुलाई में भारी गिरावट का सामना करने वाले कई एनर्जी शेयर अब अपने निचले स्तर से 21 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। दुनिया की दिग्गज तेल उत्पादक कंपनियां शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल भी इस तेजी का फायदा उठा रही हैं।
दूसरी तिमाही में शेवरॉन की कमाई में 240 प्रतिशत, जबकि एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में 115 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिफाइनरी कंपनियों को भी सप्लाई संकट का फायदा मिल रहा है और वे रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज कर रही हैं।
युद्ध लंबा खिंचने का बाजार पर असर
कुछ समय पहले तक निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही कोई कूटनीतिक समझौता हो सकता है। युद्धविराम की इसी उम्मीद के कारण तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई थी।
हालांकि, अब बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिका-ईरान तनाव जल्द खत्म नहीं होने वाला। टोरटॉयज कैपिटल के वरिष्ठ पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल के अनुसार, पहले कई निवेशक एनर्जी शेयरों की तेजी का फायदा उठाने से चूक गए थे, लेकिन अब वे इस मौके को गंवाना नहीं चाहते।
निवेशकों को आशंका है कि मध्य पूर्व में सप्लाई बाधित रहने के कारण आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
महंगाई का डर फिर से हावी
एक तरफ ऊर्जा कंपनियां महंगे कच्चे तेल से भारी मुनाफा कमा रही हैं, तो दूसरी तरफ बाकी शेयर बाजार में चिंता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है। इससे दुनियाभर में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा होता है।
इसी महंगाई की आशंका के चलते मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। एसएंडपी 500 में 0.7 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
एनवीडिया और इंटेल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.70 प्रतिशत के पार चली गई, जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
यूरोपीय बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, लंदन का एफटीएसई 100 अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा। इसकी एक बड़ी वजह बीपी और शेल जैसी बड़ी ऊर्जा कंपनियों का इंडेक्स में मजबूत दबदबा माना जा रहा है।

