WPI Inflation: थोक महंगाई ने बढ़ाई चिंता, जून में 9.87% पर पहुंची; खाद्य पदार्थ और औद्योगिक उत्पाद हुए महंगे

Thecity news
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जून में WPI महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ी, खाद्य वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग लागत में उछाल; ईंधन और दवाओं की कीमतों में राहत

नई दिल्ली: देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। खुदरा महंगाई (CPI) के बाद अब थोक महंगाई (WPI) ने भी सरकार और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.87% हो गई, जबकि मई 2026 में यह 9.68% थी। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से भी अधिक रहा।

रॉयटर्स के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने जून में WPI महंगाई 9.15% रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे काफी ऊपर रहे। सरकार के मुताबिक, खाद्य पदार्थों, खनिज तेल, बुनियादी धातुओं, रसायनों और औद्योगिक उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने थोक महंगाई को ऊपर पहुंचाया।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य सूचकांक जून में बढ़कर 6.14% हो गया, जो मई में 4.49% था। महीने-दर-महीने आधार पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में 3.75% की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी 1.43% का इजाफा देखने को मिला, जिससे थोक महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

औद्योगिक उत्पाद भी हुए महंगे

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स के तहत शामिल 24 विनिर्माण समूहों में से 22 समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे अधिक महंगाई इन क्षेत्रों में रही—

  • बुनियादी धातु (Basic Metals)
  • रसायन एवं रासायनिक उत्पाद
  • खाद्य उत्पाद
  • मशीनरी एवं उपकरण

इन उत्पादों की बढ़ती लागत ने थोक महंगाई को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

ईंधन और दवाओं में मिली राहत

हालांकि कुछ क्षेत्रों में कीमतों में कमी भी दर्ज की गई। दवाइयों, औषधीय रसायनों और वनस्पति उत्पादों की कीमतों में गिरावट आई है।

इसके अलावा ईंधन एवं बिजली सूचकांक 113.0 से घटकर 111.1 पर आ गया। अन्य प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—

  • मिनरल ऑयल महंगाई दर: 46.48%
  • बेसिक मेटल्स: 12.31%
  • इलेक्ट्रिकल उपकरण: 11.03%
  • टेक्सटाइल्स: 10.85%

खुदरा महंगाई भी RBI के लक्ष्य से ऊपर

इससे पहले जारी जून के खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। जून में खुदरा महंगाई 4.38% रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है। यह लगातार छठा महीना है जब खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

लगातार बढ़ती खुदरा और थोक महंगाई से आने वाले महीनों में आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। साथ ही, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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