मुंबई विशेष रिपोर्ट: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तारीखों का ऐलान भले अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक तापमान पहले ही चरम पर पहुंच गया है। महायुती गठबंधन (भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। वहीं, दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने भाजपा की चिंता और बढ़ा दी है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा वार्ड सीमाओं को अंतिम मंजूरी देने के बाद अब दोनों ही खेमों में टिकट वितरण को लेकर खींचतान तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी की कुल 227 सीटों में से लगभग 44 वार्ड ऐसे हैं, जहां भाजपा और शिंदे गुट के बीच सीधी रस्साकशी की स्थिति है। ये वही सीटें हैं जहां 2017 के चुनाव में दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच जीत-हार का अंतर 1000 वोट से भी कम था।
2017 में भाजपा और शिवसेना (तत्कालीन एकजुट पार्टी) आमने-सामने थीं। अब गठबंधन बनने के बाद दोनों के दावेदार एक ही सीट पर टिकट मांग रहे हैं। स्थिति और पेचीदा इसलिए हो गई है क्योंकि 62 से अधिक पूर्व पार्षद, जिन्होंने पहले उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-UBT) से चुनाव जीता था और बाद में शिंदे गुट में शामिल हो गए, वे अपने पुराने वार्ड से टिकट की मांग पर अड़े हुए हैं।
दूसरी ओर, भाजपा के कई पूर्व पार्षद जो पिछली बार मामूली अंतर से हारे थे, अब उन्हीं सीटों पर पुनः दावा ठोक रहे हैं। भाजपा का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में उसका संगठनात्मक नेटवर्क और वोट शेयर मुंबई में काफी बढ़ा है, इसलिए इस बार पार्टी को अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
शिंदे गुट 110 से 114 सीटों की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा अपने मजबूत प्रदर्शन के आधार पर अधिक हिस्सेदारी चाहती है। वहीं, एनसीपी (अजित पवार गुट) भी 25–30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि “महायुती मिलकर चुनाव लड़ेगी”, हालांकि कुछ सीटों पर “फ्रेंडली कॉन्टेस्ट” की संभावना को लेकर पार्टी में असंतोष की लहर है।
इसी बीच, राजनीतिक गलियारों में एक नया समीकरण तेजी से चर्चा में है उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का संभावित गठबंधन।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर शिवसेना (UBT) और MNS के बीच सही सीट-शेयरिंग और जमीनी तालमेल बैठ जाता है, तो यह भाजपा और शिंदे गुट के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
शिवसेना (UBT) का संगठन मुंबई में मजबूत और जमीनी स्तर तक फैला हुआ है, वहीं MNS को इस गठबंधन से नई राजनीतिक ऊर्जा और कार्यकर्ता नेटवर्क मिल सकता है जो पारंपरिक मराठी वोट बैंक को फिर से एकजुट कर सकता है।
शिवसेना (UBT) के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “जो पार्षद शिंदे गुट में गए थे, उन्हें राज्य सरकार से पिछले दो सालों में भरपूर फंड मिला। अब भाजपा उन्हीं सीटों पर दावा कर रही है, जिससे गठबंधन में असंतोष बढ़ रहा है।”
वहीं, शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा, “जहां जिस पार्टी की पकड़ मजबूत है, वहां उसी को टिकट मिलना चाहिए। शिवसेना की जड़ें मुंबई में गहरी हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी चुनाव न सिर्फ महायुती गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा होगा, बल्कि यह यह भी तय करेगा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अगर साथ आए, तो क्या वे मुंबई के पारंपरिक मराठी मतदाता को फिर से एक मंच पर ला पाएंगे।
अगर महायुती के भीतर सीट बंटवारे पर समय रहते सहमति नहीं बनी और दूसरी ओर ठाकरे बंधु गठबंधन को अंतिम रूप दे देते हैं, तो मुंबई का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
हालांकि महायुति के दोनों शीर्ष नेताओं ने साफ कर दिया है कि इस बार महायुति का ही मेयर होगा, लेकिन उद्धव-राज की जोड़ी ने भी महायुति की टेंशन बढ़ा दी है।
अब नजरें राज्य निर्वाचन आयोग पर हैं, जो जल्द ही मतदाता सूची और वार्ड आरक्षण का ड्राफ्ट जारी करने वाला है। इसके बाद चुनाव की अधिसूचना आने की संभावना है। तब तक सभी दलों में टिकट की जोड़-तोड़ और रणनीतिक बैठकें जारी रहेंगी।

