असम में 91,385 डी-वोटर्स दर्ज, फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने 56,728 लोगों को विदेशी घोषित किया; सरकार ने कहा- कोर्ट में लंबित मामलों में नहीं हुई कार्रवाई
असम सरकार ने पिछले दो वर्षों में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,679 लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को विधानसभा में दी। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2025 के बीच की गई। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक बदरुद्दीन अजमल के सवाल के जवाब में दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध प्रवासियों को अप्रवासी अधिनियम, 1950 के तहत वापस भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रही है और कार्रवाई के दौरान संबंधित लोगों के मानवाधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की अपील अदालत में लंबित है, उन्हें वापस नहीं भेजा गया है।
असम में 91 हजार से अधिक डी-वोटर्स
कांग्रेस विधायक नूरुल इस्लाम के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की मतदाता सूची में फिलहाल 91,385 डी-वोटर्स (संदिग्ध नागरिकता वाले मतदाता) दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक 13,719 डी-वोटर्स सोनितपुर जिले में हैं, जबकि बारपेटा जिले में इनकी संख्या 8,081 है।
उन्होंने बताया कि 1997 से चुनाव आयोग के निर्देश पर नियमित मतदाताओं और डी-वोटर्स की पहचान की प्रक्रिया लगातार जारी है।
56 हजार से अधिक लोगों को विदेशी घोषित किया गया
मुख्यमंत्री के अनुसार, फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल अब तक 56,728 डी-वोटर्स को विदेशी घोषित कर चुका है। वहीं 65,171 लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है। इसके अलावा गुवाहाटी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने 42 लोगों की भारतीय नागरिकता को बरकरार रखा, जबकि अपील करने वाले 831 लोगों को अदालत ने विदेशी घोषित किया।
1997 से अब तक 31 हजार से ज्यादा लोगों को किया गया निष्कासित
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि जब 1997 में डी-वोटर्स की पहचान की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब राज्य में 1,99,596 संदिग्ध मतदाता दर्ज किए गए थे। तब से अब तक 31,389 लोगों को विदेशी घोषित कर देश से बाहर भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए की जा रही है।

