महाराष्ट्र कांग्रेस में जिलाध्यक्ष नियुक्तियों पर घमासान, दिल्ली दरबार पहुंची शिकायतें; 6 महीने बाद होगी समीक्षा

Thecity news
3 Min Read

महाराष्ट्र कांग्रेस में हाल ही में विभिन्न जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष उभरकर सामने आया है। राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा लेकर पार्टी आलाकमान का दरवाजा खटखटाया है। शिकायतों के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है, लेकिन फिलहाल किसी भी जिलाध्यक्ष को हटाने या बदलने का फैसला नहीं किया गया है।

छह महीने तक नहीं होगा कोई बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में नियुक्त किए गए जिलाध्यक्षों को कम से कम छह महीने तक काम करने का अवसर दिया जाएगा। इस दौरान उनके प्रदर्शन और संगठनात्मक कार्यों का आकलन किया जाएगा। छह महीने बाद समीक्षा के आधार पर यह निर्णय लिया जाएगा कि उन्हें पद पर बनाए रखा जाए या बदलाव किया जाए।

हर्षवर्धन सपकाल को मिला संदेश

पार्टी नेतृत्व ने प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के कामकाज की सराहना करते हुए उन्हें संगठन को और मजबूत बनाने की सलाह दी है। साथ ही यह भी संदेश दिया गया है कि प्रदेश संगठन प्रमुख के रूप में सभी नेताओं को साथ लेकर चलना आवश्यक है, ताकि पार्टी के भीतर समन्वय और एकजुटता बनी रहे।

‘सृजन संगठन अभियान’ के तहत हुई थीं नियुक्तियां

कांग्रेस ने देशभर में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के उद्देश्य से ‘सृजन संगठन अभियान’ चलाया था। इस अभियान के तहत विभिन्न राज्यों के कांग्रेस नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में भेजा गया था। उनकी रिपोर्ट और स्थानीय स्तर पर प्राप्त फीडबैक के आधार पर नए जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां की गई थीं।

विदर्भ में सबसे ज्यादा नाराजगी

जानकारी के अनुसार, विदर्भ क्षेत्र के कुछ सांसदों और विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर जिलाध्यक्ष नियुक्तियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। नेताओं का कहना है कि कई जिलों में नियुक्तियां स्थानीय समीकरणों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर नहीं की गईं। उन्होंने असंतोष वाले जिलाध्यक्षों को तत्काल बदलने की मांग भी रखी है।

नेतृत्व ने लिया संज्ञान, लेकिन फिलहाल यथास्थिति बरकरार

कांग्रेस हाईकमान ने सांसदों और विधायकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया है, लेकिन संगठन में स्थिरता बनाए रखने के लिए फिलहाल किसी भी जिलाध्यक्ष को हटाने का फैसला नहीं किया गया है। पार्टी का मानना है कि नए पदाधिकारियों को काम करने का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि उनके प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *