ओडिशा के प्रसिद्ध फसल उत्सव पर राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी बधाई, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा के पारंपरिक और प्रसिद्ध फसल उत्सव ‘राजा पर्व’ के अवसर पर राज्यवासियों और देशभर के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि यह पर्व प्रकृति और समाज के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है तथा लोगों को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि मानसून के आगमन के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार धरती और बादलों के सम्मान का उत्सव है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पर्व लोगों को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देगा। साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
राष्ट्रपति भवन में भी मनाया गया राजा पर्व
राष्ट्रपति भवन में भी राजा पर्व के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस सांस्कृतिक आयोजन में भाग लिया और ओडिशा की समृद्ध परंपराओं को सम्मान दिया।
इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए पारंपरिक उड़िया व्यंजनों की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में पेठा, शर्बत, पान सहित कई स्थानीय व्यंजन परोसे गए। साथ ही मेहंदी कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया, जिससे उत्सव का सांस्कृतिक रंग और अधिक आकर्षक बन गया।
क्या है राजा पर्व का महत्व?
राजा पर्व ओडिशा का एक प्रमुख कृषि और सांस्कृतिक त्योहार है, जिसे धरती माता के सम्मान में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस पर्व के दौरान धरती माता, जिन्हें देवी भूमि या भूदेवी के रूप में पूजा जाता है, रजस्वला होती हैं। इस अवधि में भूमि को विश्राम दिया जाता है और खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों को रोक दिया जाता है।
‘राजा’ शब्द संस्कृत के ‘राजस’ शब्द से निकला माना जाता है, जिसका संबंध स्त्रीत्व और प्रजनन क्षमता से जोड़ा जाता है। रजस्वला महिला को संस्कृत में ‘रजस्वला’ कहा जाता है। यही कारण है कि यह पर्व नारी शक्ति, उर्वरता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
चौथे दिन होता है वसुमती स्नान
राजा पर्व आमतौर पर चार दिनों तक मनाया जाता है। पहले तीन दिनों को धरती माता के विश्राम का समय माना जाता है, जबकि चौथे दिन ‘वसुमती स्नान’ की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान धरती माता का विशेष पूजन किया जाता है और समृद्धि की कामना की जाती है।
ओडिशा की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी भूमि को भगवान जगन्नाथ की पत्नी के रूप में भी पूजा जाता है। पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के समीप देवी भूमि की चांदी की प्रतिमा भी स्थापित है।
ओडिशा का सबसे लोकप्रिय लोक उत्सव
राजा पर्व को ओडिशा का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय त्योहार माना जाता है। इस पर्व के पहले दिन को ‘सजाबजा’ कहा जाता है, जब घरों की सफाई की जाती है और महिलाएं नई साड़ियां तथा आभूषण पहनकर उत्सव में भाग लेती हैं।
मानसून के स्वागत के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व में झूले, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और विशेष व्यंजन प्रमुख आकर्षण होते हैं। कई विद्वान इस उत्सव की तुलना असम के प्रसिद्ध अंबुवाची मेले से भी करते हैं, क्योंकि दोनों पर्वों में धरती माता और उर्वरता की पूजा का विशेष महत्व है।

