Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच तेज, 3 आरोपी पुलिस रिमांड पर; हो सकते हैं बड़े खुलासे

Thecity news
5 Min Read

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच नए चरण में, पुलिस करेगी आमने-सामने पूछताछ; डिजिटल सबूत और पैसों के लेन-देन की भी होगी पड़ताल

अयोध्या स्थित Ram Mandir के दान (चढ़ावा) चोरी मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन आरोपियों को अदालत के आदेश पर पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान चोरी की रकम, उसके इस्तेमाल, लेन-देन और इस पूरे मामले से जुड़े अन्य लोगों को लेकर कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस अब आरोपियों से आमने-सामने और अलग-अलग पूछताछ कर चोरी की पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी। जांच का मुख्य फोकस यह जानने पर रहेगा कि चोरी की गई रकम कहां खर्च की गई, उसे कैसे छिपाया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पूछताछ के आधार पर जुटाए जाएंगे नए साक्ष्य

पुलिस ने अदालत में रिमांड की मांग करते हुए कहा था कि आरोपियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के आधार पर अभी कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने बाकी हैं। जांच अधिकारी मानते हैं कि कस्टडी रिमांड के दौरान मिली जानकारी से नए डिजिटल और भौतिक साक्ष्य सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

SIT की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

राम मंदिर दान चोरी का मामला सामने आने के बाद Government of Uttar Pradesh ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT की शुरुआती रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच आगे बढ़ाई गई।

इससे पहले अदालत की अनुमति मिलने पर पुलिस जेल में जाकर भी आरोपियों से पूछताछ कर चुकी है। एक आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ के दौरान वाहन समेत कुछ महत्वपूर्ण बरामदगी भी की गई थी।

तीन आरोपियों से होगी गहन पूछताछ

पुलिस ने तीन आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय—की सात दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। हालांकि, विशेष न्यायालय ने सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों की 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर कर दी।

सुनवाई के दौरान मामले के विवेचक और अयोध्या के सीओ आशुतोष तिवारी अदालत में उपस्थित रहे। पुलिस ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच और साक्ष्य जुटाना आवश्यक है।

आरोपियों ने किया रिमांड का विरोध

आरोपियों की ओर से नियुक्त अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने पुलिस की रिमांड अर्जी का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) ने पुलिस की मांग स्वीकार करते हुए सीमित अवधि की कस्टडी रिमांड मंजूर कर दी।

इसके बाद बुधवार सुबह पुलिस तीनों आरोपियों को जेल से अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ के लिए रवाना हुई।

मोबाइल चैट और डिजिटल सबूत बने जांच का आधार

इस मामले में पहले भी अदालत की अनुमति के बाद पुलिस ने करीब पांच घंटे तक आरोपियों से जेल में पूछताछ की थी। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले थे।

जांच अधिकारियों ने आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ करने के साथ-साथ उनके बयानों का मौके पर सत्यापन भी कराया था।

रिमांड के दौरान हो सकती हैं नई बरामदगियां

पुलिस को उम्मीद है कि कस्टडी रिमांड के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर डिजिटल रिकॉर्ड, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामान बरामद हो सकते हैं। SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की योजना कैसे बनाई गई, रकम का प्रवाह किन-किन लोगों तक पहुंचा और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *