देश में STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रही हैं। इसके बावजूद सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में विज्ञान शिक्षा का बुनियादी ढांचा अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। संसद में केंद्र सरकार ने बताया है कि देश के करीब 49 फीसदी सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब उपलब्ध नहीं है। राज्यों में राजस्थान और बिहार इस मामले में सबसे पीछे हैं।
देश के करीब आधे सरकारी स्कूलों में नहीं साइंस लैब
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब की स्थिति की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार:
- शैक्षणिक सत्र 2023-24: 50.2% सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब
- शैक्षणिक सत्र 2024-25: 50.7% स्कूलों में साइंस लैब
- शैक्षणिक सत्र 2025-26: 50.1% स्कूलों में साइंस लैब
इन आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में लगभग 49.9 फीसदी सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब नहीं है।
राजस्थान और बिहार सबसे पीछे
संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब की उपलब्धता के मामले में राजस्थान और बिहार सबसे निचले पायदान पर हैं।
- राजस्थान: 20.9% स्कूलों में साइंस लैब
- बिहार: 22.9% स्कूलों में साइंस लैब
- गुजरात: 29.2% स्कूलों में साइंस लैब
- पश्चिम बंगाल: 29.6% स्कूलों में साइंस लैब
इसका मतलब है कि राजस्थान और बिहार के अधिकांश सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में छात्रों को प्रयोगात्मक विज्ञान शिक्षा की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली सबसे आगे
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में साइंस लैब उपलब्ध कराने के मामले में देश में शीर्ष पर है।
शीर्ष राज्य/केंद्र शासित प्रदेश:
- दिल्ली: 99.6% स्कूलों में साइंस लैब
- गोवा: 89.4% स्कूलों में साइंस लैब
- पंजाब: 82.8% स्कूलों में साइंस लैब
STEM शिक्षा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि साइंस लैब की कमी छात्रों की प्रयोगात्मक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के विकास को प्रभावित करती है। ऐसे समय में जब देश STEM शिक्षा को बढ़ावा देने और विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है, सरकारी स्कूलों में प्रयोगशाला सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

