दिल्ली विधानसभा में डीयूएसआईबी संशोधन विधेयक पास, झुग्गी बस्तियों की पहचान की कट-ऑफ तारीख 2006 से बढ़कर 2025

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शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा- संशोधन से झुग्गीवासियों को पक्के मकान और सम्मानजनक पुनर्वास देने का रास्ता होगा साफ

दिल्ली विधानसभा में मंगलवार (11 अगस्त) को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) संशोधन विधेयक पास हो गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार ने दिल्ली की बदलती वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए 19 साल पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि डीयूएसआईबी अधिनियम में संशोधन के माध्यम से झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की पहचान के लिए निर्धारित 1 जनवरी 2006 की कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 किया जा रहा है।

सूद ने कहा कि यह संशोधन केवल कानून में बदलाव नहीं है, बल्कि दिल्ली के गरीब और झुग्गीवासियों को बेहतर जीवन, पक्के मकान और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के साथ डीयूएसआईबी की पुनर्विकास, नागरिक सुविधाओं में सुधार और पुनर्वास से जुड़ी जिम्मेदारियों का दायरा भी बढ़ेगा।

सरकार इन-सीटू डेवलपमेंट के मॉडल को आगे बढ़ाएगी

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार इन-सीटू डेवलपमेंट के मॉडल को आगे बढ़ाएगी। इसके तहत झुग्गीवासियों को उनके वर्तमान क्षेत्र में ही बेहतर और पक्के मकान उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिससे उनके रोजगार और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

जहां झुग्गी, वहां मकान के पुराने वादों पर विपक्ष से सवाल

मंत्री आशीष सूद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने वर्षों तक अफोर्डेबल हाउसिंग फॉर ऑल और ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ जैसे नारे दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर झुग्गीवासियों के जीवन में अपेक्षित बदलाव नहीं किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के 70 सूत्रीय एजेंडे में अफोर्डेबल हाउसिंग फॉर ऑल और इन-सीटू डेवलपमेंट ऑफ स्लम्स का उल्लेख किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 के चुनाव में भी ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ का वादा किया गया, लेकिन वर्षों तक कोई व्यापक समाधान सामने नहीं आया।

सूद ने कहा कि केवल राजनीतिक नारों और भय की राजनीति के माध्यम से गरीबों को गुमराह करने के बजाय अब दिल्ली सरकार स्पष्ट कानून, स्पष्ट नीति और स्पष्ट कार्ययोजना के साथ काम कर रही है।

डीयूएसआईबी पर वर्ष 2025-26 में खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि

आशीष सूद ने कहा कि आंकड़े पूर्ववर्ती सरकारों की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में झुग्गी-झोपड़ियों से संबंधित कार्यों पर लगभग 206 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 346 करोड़ रुपये हो गई है।

उन्होंने बताया कि जे जे क्लस्टरों के शौचालयों के रखरखाव पर वर्ष 2014-15 में लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 76.94 करोड़ रुपये हो गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा डीयूएसआईबी को मिलने वाली धनराशि की अंतिम किस्त वित्तीय वर्ष समाप्त होने से ठीक पहले जारी की जाती थी, जिससे गरीबों के हित में उसका प्रभावी उपयोग मुश्किल हो जाता था। वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था में सुधार करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।

इन-सीटू डेवलपमेंट करके देंगे अच्छे मकान

सूद ने कहा कि सरकार केवल कागजों पर योजनाएं और नारे नहीं देगी, बल्कि इन-सीटू डेवलपमेंट के जरिए झुग्गीवासियों को वहीं बेहतर और पक्के मकान उपलब्ध कराएगी। इससे उनका रोजगार और सामाजिक ताना-बाना भी बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार गरीबों के लिए एक एकीकृत मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें आवास के साथ-साथ भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सम्मान को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

अंत्योदय की सोच से गरीबों के जीवन में समग्र बदलाव

शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। गरीबों के लिए घर, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की अंत्योदय की सोच का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जे जे क्लस्टरों में गरीब परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अटल कैंटीन जैसी पहल इसी समग्र दृष्टिकोण का हिस्सा है।

विपक्ष के वॉकआउट पर भी साधा निशाना

मंत्री सूद ने विपक्षी विधायकों के सदन से अनुपस्थित रहने पर कहा कि जब गरीबों के घरों और उनके भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक सदन में चर्चा के लिए आया, तब विपक्ष को सकारात्मक चर्चा में भाग लेना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा बार-बार चावल, दवाई और साइकिल जैसे मुद्दों की आड़ में सरकार के जनहित के कार्यों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने जेम पोर्टल के माध्यम से साइकिल खरीद को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस देश की पारदर्शी सरकारी खरीद व्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि किसी विक्रेता की बोली नियमों के अनुसार एल-1 आती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसी से खरीद की जाती है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष के लिए निर्णय लेने की कोई गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया के तहत छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराई है और इस जनहित के कार्य को राजनीतिक आरोपों के माध्यम से बदनाम करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

एक बोतल के बदले हर बेटी को साइकिल और हर बहन को सम्मान

आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली की जनता ने नकारात्मक राजनीति को नकारकर विकास और जनकल्याण को चुना है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शराब की राजनीति को बढ़ावा दिया गया, जबकि वर्तमान सरकार बेटियों और महिलाओं के सशक्तीकरण पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि नौवीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल, महिलाओं के लिए 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता और होली-दिवाली पर एलपीजी सिलेंडर जैसी पहलों के माध्यम से सरकार अपने वादों को जमीन पर उतार रही है।

मंत्री ने कहा कि दिल्ली में पिछले 19 वर्षों से लंबित झुग्गी पुनर्वास की समस्या को अब केवल राजनीतिक नारे के रूप में नहीं, बल्कि कानूनी, प्रशासनिक और कार्यान्वयन के स्तर पर समाधान के रूप में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था बदलने पर मुश्किलें आएंगी, लेकिन यह बदलाव गरीबों के जीवन में सुधार, पक्के मकान और सम्मानजनक जीवन की दिशा में उठाया गया कदम है।

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