IIT दिल्ली छात्र ऋषिकेश कुमार के निधन से शोक में कैंपस, बाहरी जांच समिति गठित करेगा संस्थान

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आईआईटी दिल्ली के एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार के दुखद निधन से पूरे परिसर में शोक का माहौल है। संस्थान ने उनके असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि इस मुश्किल समय में वह ऋषिकेश के परिवार और दोस्तों के साथ मजबूती से खड़ा है। ऋषिकेश को श्रद्धांजलि देने के लिए 24 अगस्त 2026 को आईआईटी दिल्ली परिसर में शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने हिस्सा लिया।

संस्थान ने बताया कि ऋषिकेश के परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए फैकल्टी, स्टाफ और छात्रों के सहयोग से मदद जुटाई जा रही है। ऋषिकेश ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया था और वह कैंपस के हॉस्टल में रह रहे थे। संस्थान के अनुसार, वह पढ़ाई में काफी होशियार छात्र थे।

छात्रों ने सेहत को लेकर जताई थी चिंता

आईआईटी दिल्ली के मुताबिक, इस साल होली के कुछ दिनों बाद ऋषिकेश के साथ रहने वाले छात्रों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद उन्हें आईआईटी दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया, जहां संस्थान के मनोचिकित्सक ने उनकी जांच की और जरूरी मेडिकल सहायता दी।

इसके बाद परिवार की इच्छा पर ऋषिकेश को एक बड़े स्पेशल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां करीब एक महीने तक उनका इलाज चला और बाद में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि, उनके अचानक निधन से पूरा संस्थान स्तब्ध है।

स्वास्थ्य कारणों से पढ़ाई से ब्रेक पर थे ऋषिकेश

संस्थान ने बताया कि ऋषिकेश स्वास्थ्य कारणों से पढ़ाई से ब्रेक पर थे। आईआईटी दिल्ली लगातार उनके इलाज और काउंसलिंग में मदद कर रहा था। ऋषिकेश ने जनवरी से मई 2026 के दूसरे सेमेस्टर से ब्रेक लेने का अनुरोध किया था, जिसे संस्थान ने मंजूरी दे दी थी।

इसके बाद जुलाई से नवंबर 2026 के तीसरे सेमेस्टर से भी नाम वापस लेने के उनके अनुरोध को स्वीकृति दी गई थी। जुलाई 2026 में उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की दोबारा जांच की गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें माता-पिता की देखरेख में रहने की सलाह दी थी।

जुलाई और अगस्त में भी इलाज और काउंसलिंग जारी रही

आईआईटी दिल्ली के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2026 में संस्थान के डॉक्टरों और काउंसलर्स ने ऋषिकेश का इलाज और काउंसलिंग जारी रखा। संस्थान ने कहा कि वह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और छात्रों को समय पर प्रोफेशनल मदद उपलब्ध कराने के लिए अपने सपोर्ट सिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है।

कैंपस में 15 काउंसलर्स और 3 मनोचिकित्सक

आईआईटी दिल्ली ने बताया कि कैंपस में इस समय 15 काउंसलर्स, एक फुल-टाइम मनोचिकित्सक और दो पार्ट-टाइम मनोचिकित्सक तैनात हैं। इनमें से एक डॉक्टर एम्स और एक विमहंस अस्पताल से जुड़े हैं।

संस्थान में एम्पैनल्ड काउंसलर्स की सुविधा भी उपलब्ध है। आईआईटी दिल्ली के मुताबिक, छात्रों के इलाज और काउंसलिंग का पूरा खर्च संस्थान खुद उठाता है।

ऋषिकेश के निधन की बाहरी जांच होगी

आईआईटी दिल्ली ने ऋषिकेश कुमार के निधन को गंभीरता से लेते हुए घटना की निष्पक्ष और पूरी जांच कराने का फैसला किया है। संस्थान ने बताया कि मामले की गहराई से जांच के लिए एक बाहरी जांच समिति गठित की जा रही है।

यह समिति घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी और यह भी देखेगी कि छात्रों की मदद के लिए मौजूदा व्यवस्था को और किस तरह मजबूत किया जा सकता है।

बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव

संस्थान में यदि छात्रों की किसी शिकायत का समाधान नहीं हो पाता है, तो उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके साथ ही आईआईटी दिल्ली ने छात्रों से अपने सुझाव और चिंताएं साझा करने की अपील की है, ताकि कैंपस को अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और मददगार बनाया जा सके।

छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिकता

आईआईटी दिल्ली ने कहा है कि छात्रों की भलाई और मानसिक स्वास्थ्य उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। संस्थान के अनुसार, छात्रों को केवल विद्यार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है। प्रशासन ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और देखभाल के लिए जरूरी कदम आगे भी लगातार उठाए जाते रहेंगे।

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