ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। 1501वीं ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर दारुस्सलाम में ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ को संबोधित करते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS और BJP ने ऐतिहासिक रूप से संविधान की जगह मनुस्मृति को प्राथमिकता दी है।
ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े फैसले पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह आदेश इस्लाम पर सीधा हमला और मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में फैसले के लिए सुरक्षित है।
RSS ने संविधान का किया था विरोधः ओवैसी
संविधान और मनुस्मृति को लेकर ओवैसी ने कहा कि देश ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया था, लेकिन इसके चार दिन बाद 30 नवंबर को संघ के मुखपत्र में संविधान को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उनके मुताबिक, उस लेख में संविधान के बजाय मनुस्मृति को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई थी।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि संघ से जुड़े लोगों को डॉ. बीआर आंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान से आपत्ति थी।
सावरकर और स्वतंत्रता सेनानियों का किया जिक्र
हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर का जिक्र करते हुए AIMIM प्रमुख ने अंडमान के सेलुलर जेल में उनके समय और स्वतंत्रता सेनानी अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी के संघर्ष की तुलना की। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सावरकर ने अंग्रेजों को पत्र लिखकर रिहाई की मांग की थी, जबकि फजल-ए-हक खैराबादी ने जेल में यातनाएं झेलने के बावजूद अंग्रेजों के सामने समझौता नहीं किया।
सेलुलर जेल का पहला कैदी मुसलमान था- ओवैसी
ओवैसी ने दावा किया कि अंडमान भेजे गए शुरुआती कैदियों में हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन शामिल थे और उन्होंने उन्हें सेलुलर जेल का पहला कैदी बताया। उन्होंने कहा कि मौलवी अलाउद्दीन मक्का मस्जिद के इमाम थे।
ओवैसी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मनुस्मृति को लेकर की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया और सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा।
SIR को लेकर बोले- नोटिस मिले तो घबराएं नहीं
दक्षिणी राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि जिन लोगों के नाम ‘विसंगतियों’ की सूची में आए हैं, उन्हें डरने या परेशान होने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को नोटिस मिलता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए। ओवैसी ने दावा किया कि उनकी पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ता पूरी प्रक्रिया के दौरान ऐसे लोगों के साथ खड़े रहेंगे।
हैदराबाद में ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग
तेलंगाना में नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी ओवैसी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खासकर हैदराबाद में कई युवा नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका जीवन और भविष्य प्रभावित हो रहा है।
ओवैसी ने युवाओं से नशे की लत से बाहर निकलने के लिए मदद लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह खुद भी कभी सिगरेट पीते थे, लेकिन अब छोड़ चुके हैं। उन्होंने नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को मदद का भरोसा दिया।
हत्या के मामलों की एक साल में सुनवाई की मांग
हैदराबाद में लगातार हो रही हत्याओं पर चिंता जताते हुए ओवैसी ने तेलंगाना सरकार से शहर में हत्याओं की रोकथाम और जांच के लिए एक समर्पित ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हत्या से जुड़े मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। ओवैसी ने बताया कि उन्होंने तेलंगाना सरकार को इस संबंध में पहले ही एक ज्ञापन सौंपा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से हत्या के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने पर विचार करने का अनुरोध करने की भी अपील की।

