निदेशक से बैठक के बाद छात्रों ने रखीं मांगें, एक करोड़ रुपये मुआवजा और एसोसिएट डीन के इस्तीफे पर भी अड़े
आईआईटी दिल्ली के 31 वर्षीय एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान के निदेशक के साथ छात्र प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। छात्रों ने स्वतंत्र जांच समिति के गठन के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन जांच का दायरा और व्यापक करने की मांग की है। छात्रों के मुताबिक, स्वतंत्र जांच समिति के अध्यक्ष को बदलने और प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से समिति में छात्र सदस्यों को नामित किए जाने पर निदेशक की सहमति बनी है।
हालांकि, छात्रों का कहना है कि समिति के मौजूदा कार्यादेश में ऋषिकेश की मां की ओर से पुलिस को दिए गए बयान में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। छात्रों ने मांग की है कि समिति संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की मेरिट का भी मूल्यांकन करे और जवाबदेही तय करने पर विचार करे।
जांच पूरी होने तक निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग
छात्रों ने जांच पूरी होने तक निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक्टिंग एसोसिएट डीन हॉस्टल मैनेजमेंट और एक्टिंग एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेलफेयर की नियुक्ति की मांग की है। स्वतंत्र जांच समिति के अध्यक्ष के लिए छात्रों ने पूर्व न्यायाधीशों जस्टिस एस। मुरलीधर, जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस आशा मेनन के नाम प्रस्तावित किए हैं।
छात्रों का कहना है कि स्वतंत्र जांच समिति को केवल मौत की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की भी विस्तृत जांच करनी चाहिए। उनका मानना है कि आरोपों की मेरिट का मूल्यांकन होने के साथ जिम्मेदारी तय करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
ऋषिकेश के परिवार को उचित और पर्याप्त मुआवजा देना भी प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल है। छात्रों के मुताबिक, IIT दिल्ली प्रशासन ने बेनेवोलेंट फंड, मेडिकल खर्च का कवरेज और फंडरेजर के जरिए राशि जुटाने का प्रस्ताव दिया है।
छात्रों ने मांग की है कि एक करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि जुटाने की जिम्मेदारी IIT दिल्ली प्रशासन ले। साथ ही प्रशासन राशि जुटाने की अनुमानित समयसीमा बताए। अगर फंडरेजर से पूरी रकम नहीं जुट पाती है तो बाकी राशि की भरपाई के लिए वैकल्पिक माध्यम तलाशने की स्पष्ट प्रतिबद्धता भी दी जाए।
छात्रों ने कहा कि मुआवजे से जुड़ी बातचीत ऋषिकेश के परिवार, बैचमेट्स और IIT दिल्ली प्रशासन के बीच ही होनी चाहिए।
एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेलफेयर के इस्तीफे पर अड़े छात्र
प्रदर्शनकारी छात्रों ने एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेलफेयर के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से उन्हें ऋषिकेश की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे हैं। हालांकि, उनका आरोप है कि छात्रों की नैतिक प्रोफाइलिंग, असंवेदनशील टिप्पणियां और मदद मांगने वाले छात्रों को फटकारने से संस्थान की सपोर्ट सिस्टम और छात्रों का भरोसा कमजोर होता है।
छात्रों ने बताया कि वे ईमेल, संदेशों और छात्रों के बयानों के जरिए ऐसे साक्ष्य जुटा रहे हैं, जिनमें संबंधित अधिकारी की ओर से छात्रों के साथ कथित टिप्पणियों का उल्लेख है। इसके अलावा छात्रों से ऐसे मामलों से जुड़े साक्ष्य भी इकट्ठा किए जा रहे हैं, जिनमें फैकल्टी और स्टाफ सदस्यों पर आत्महत्या से मौत के मामलों में असंवेदनशील या अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति
छात्रों ने कहा कि उनकी तत्काल मांगों के साथ-साथ IIT दिल्ली में छात्र-केंद्रित सेवाओं में व्यापक और व्यवस्थित बदलाव की जरूरत है। उन्होंने IIT दिल्ली के मुख्य भवन के विंड टनल पर सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों की रिकॉर्डिंग किए जाने की भी निंदा की है।
छात्रों ने IIT दिल्ली प्रशासन से छात्रों के प्रदर्शन करने, न्याय की मांग करने और जवाबदेही तय कराने के मौलिक अधिकार की रक्षा करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता देने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि ऋषिकेश की मौत की निष्पक्ष जांच के साथ संस्थान की छात्र सहायता व्यवस्था में भी जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।

