श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अब केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देशभर में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों का आधार बन रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आकलन के मुताबिक, इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में ₹40,000 करोड़ से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है। इसमें उपभोक्ता मांग, घरेलू खरीदारी, धार्मिक पर्यटन, मंदिरों में होने वाला खर्च और त्योहार से जुड़े विभिन्न कारोबार शामिल हैं।
जन्माष्टमी के कारोबार में 30 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
कैट के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर के अनुसार, वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के दौरान करीब ₹25,000 करोड़ का व्यापार हुआ था। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ पहुंच गया।
इस वर्ष कारोबार में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। इसके चलते जन्माष्टमी से जुड़े कारोबार का आंकड़ा ₹40,000 करोड़ से अधिक पहुंचने की संभावना है। वहीं मुंबई एमएमआर में गोविंदा दही हांडी की धूम के चलते करीब ₹3,500 करोड़ के कारोबार का अनुमान लगाया गया है।
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी आस्था, परंपरा और आर्थिक गतिविधियों का संगम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान के कारण त्योहारों के दौरान भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
इस बढ़ती मांग का सीधा लाभ स्थानीय व्यापारियों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प कारोबारियों तथा सूक्ष्म और लघु उद्यमों को मिल रहा है। त्योहारों के दौरान स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीदारी छोटे कारोबारियों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करती है।
मिठाई से लेकर पूजा सामग्री तक इन क्षेत्रों में बढ़ी मांग
कैट के आकलन के मुताबिक जन्माष्टमी से जुड़े अनुमानित कारोबार में मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। पूजा सामग्री का हिस्सा 10 प्रतिशत, फूल-माला एवं सजावट का 12 प्रतिशत और पारंपरिक परिधानों का करीब 10 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
फल, सूखे मेवे और प्रसाद से जुड़े कारोबार की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, झूलों और श्रृंगार सामग्री की 8 प्रतिशत, उपहार, खिलौने और घरेलू सजावट की 5 प्रतिशत तथा धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का हिस्सा करीब 10 प्रतिशत रह सकता है।
जन्माष्टमी के चलते माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और मिठाइयों के अलावा फल, सूखे मेवे, पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, बंदनवार, झूले, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार से जुड़े उत्पादों की मांग में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
धार्मिक पर्यटन से होटल और परिवहन कारोबार को फायदा
जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन, द्वारका और नाथद्वारा सहित प्रमुख कृष्ण मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इससे धार्मिक पर्यटन से जुड़े होटल, परिवहन, रेस्तरां, प्रसाद, फूल और स्थानीय हस्तशिल्प कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
कैट के मुताबिक त्योहारों पर होने वाला खर्च केवल उपभोक्ता खरीदारी तक सीमित नहीं रहता। इसका लाभ किसानों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, छोटे व्यापारियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों तक पहुंचता है। कैट ने इस विकेंद्रीकृत आर्थिक गतिविधि को भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की जीवंत शक्ति बताया है।

