बच्चों के नंबरों के पीछे पड़े अभिभावक, शिक्षा मंत्री ने बताया क्या हो रहा है नुकसान

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प्रल्हाद जोशी ने रटने के बजाय अनुभव से सीखने पर दिया जोर, कहा- अच्छे अंकों के दबाव में बच्चों की समझ और आत्मविश्वास प्रभावित होते हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि आज शिक्षा व्यवस्था और अभिभावक बच्चों के अंकों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने इस मानसिकता को ‘अंकवादी’ सोच बताते हुए कहा कि अच्छे नंबर लाने की होड़ में विद्यार्थियों की समझ, सीखने की क्षमता और रुचि पीछे छूट रही है।

मंत्री ने मंगलवार को नई दिल्ली के द्वारका स्थित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के एकीकृत कार्यालय परिसर में एक्सपीरियंस सेंटर के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उन्होंने रटकर सीखने के बजाय अनुभव के माध्यम से शिक्षा देने और बच्चों पर अंकों का दबाव कम करने की जरूरत बताई।

अंकों के दबाव से घटता है आत्मविश्वास

जोशी ने कहा कि विद्यार्थियों का काफी समय पाठ याद करने और अच्छे अंक लाने की योजना बनाने में बीत जाता है। अभिभावक भी अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों को किसी तरह अच्छे नंबर हासिल करने ही हैं। उनके मुताबिक, यह मानसिकता लगभग हर परिवार में देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि इसका नुकसान बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता पर पड़ता है। अच्छे अंक लाने के दबाव में विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है। किताबों तक सीमित रहने वाला ऐसा ज्ञान, जिसका जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल न किया जा सके, बहुत कम उपयोगी होता है।

मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के पीछे भी यही सोच है कि पढ़ाई को केवल याद करने और परीक्षा में अंक हासिल करने तक सीमित न रखा जाए।

सीबीएसई ने बनाया अनुभव आधारित शिक्षा केंद्र

सीबीएसई मुख्यालय में स्थापित एक्सपीरियंस सेंटर का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक और अनुभव आधारित शिक्षा से परिचित कराना है। यहां छात्र भारतीय शिक्षा व्यवस्था के विकास, उभरती तकनीकों और भविष्य में करियर के विभिन्न विकल्पों को समझ सकेंगे।

करीब 6,000 वर्ग फुट में बने इस केंद्र में 12 प्रमुख जोन और 21 प्रदर्शनियां हैं। इनके माध्यम से भारतीय शिक्षा की प्राचीन परंपराओं से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तक के सफर को दिखाया गया है।

केंद्र में सीबीएसई के विकास को भी प्रदर्शित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोर्ड से संबद्ध स्कूलों की संख्या लगभग 309 से बढ़कर 33,000 से अधिक हो गई है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या 15,000 से कम से बढ़कर करीब एक करोड़ तक पहुंच गई है।

गुरुकुल से डिजिटल कक्षाओं तक की यात्रा

एक्सपीरियंस सेंटर में दिखाई जाने वाली ‘शिक्षा की कहानी’ फिल्म के जरिए विद्यार्थियों को भारत की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास से परिचित कराया जाएगा। इसमें प्राचीन गुरुकुल परंपरा, नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों और आधुनिक डिजिटल कक्षाओं तक के विकास को दर्शाया गया है।

यहां पुरानी तस्वीरों और वर्ष 1935 के अभिलेखों के माध्यम से सीबीएसई के इतिहास को जानने का अवसर भी मिलेगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि समय के साथ शिक्षा और पढ़ाई के तरीकों में किस तरह बदलाव आया है।

भविष्य के करियर और नवाचार पर भी जोर

केंद्र में करियर एक्सप्लोरर, फ्यूचर ऑफ प्रोफेशंस और ‘मैजिक मिरर: फ्यूचर यू’ जैसे हिस्से तैयार किए गए हैं। इनके जरिए विद्यार्थियों को अलग-अलग करियर विकल्पों, भविष्य में उभरने वाले पेशों और अपनी संभावित क्षमताओं को समझने में मदद मिलेगी।

जोशी ने अटल टिंकरिंग लैब की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 10,000 ऐसी लैब पहले से संचालित हैं और सरकार ने 50,000 अतिरिक्त लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को देखते हुए विद्यार्थियों को वैश्विक कार्यक्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि एक्सपीरियंस सेंटर स्कूली शिक्षा को अधिक रोचक, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।

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