दुनिया के टॉप-10 संग्रहालयों में शामिल हुआ बिहार म्यूजियम, भारत में मिला पहला स्थान

Thecity news
3 Min Read

पटना स्थित बिहार म्यूजियम को 2026 की वैश्विक सूची में नौवीं रैंक मिली है। यह टॉप-10 में जगह बनाने वाला एशिया का एकमात्र संग्रहालय बताया गया है।

बिहार की राजधानी पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साल 2026 में दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में इसे नौवां स्थान मिला है। यात्रा मार्गदर्शिका ‘वर्थ अ जर्नी’ की ओर से जारी इस सूची में बिहार म्यूजियम भारत का एकमात्र संग्रहालय है।

इस सूची के शीर्ष पांच संग्रहालयों में मेक्सिको सिटी का म्यूजियो नैशनल डी एंथ्रोपोलोजिया, मैड्रिड का म्यूजियो डेल प्राडो, डेनमार्क के हुमलेबेक स्थित लुइसियाना म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट, सेंट पीटर्सबर्ग का स्टेट हर्मिटेज म्यूजियम और वियना का कुन्स्टहिस्टोरिस्चेस म्यूजियम शामिल हैं।

रैंकिंग में बिहार म्यूजियम ने पेरिस के लौवर और न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट जैसे प्रतिष्ठित संग्रहालयों को भी पीछे छोड़ दिया। यह शीर्ष 10 में जगह बनाने वाला एशिया का एकमात्र संग्रहालय भी बताया गया है।

2015 में हुआ था उद्घाटन

पटना के बेली रोड पर स्थित बिहार म्यूजियम का उद्घाटन 2015 में हुआ था। इसे इस उद्देश्य से बनाया गया था कि ऐतिहासिक कलाकृतियों को बेहतर ढंग से प्रदर्शित किया जा सके। यहां प्राचीन मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोक कला का समृद्ध संग्रह मौजूद है।

इस संग्रहालय की इमारत को प्रित्जकर पुरस्कार विजेता जापानी वास्तुकार फुमिहिको माकी ने मुंबई स्थित ओपोलिस आर्किटेक्ट्स के सहयोग से डिजाइन किया था।

प्राचीन इतिहास और संस्कृति की अनमोल धरोहर

बिहार म्यूजियम में प्राचीन भारत से लेकर 1764 तक के इतिहास से जुड़ी कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। इसकी दीर्घाओं को मौर्य काल से लेकर मुगल और सूर वंश तक के विभिन्न ऐतिहासिक दौर के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

संग्रहालय में बच्चों के लिए भी एक विशेष दीर्घा है, जहां पशुओं, लोक कला, संस्कृति और विज्ञान से संबंधित प्रदर्शनियां लगाई गई हैं। इसकी प्रवासी दीर्घा बिहार की भौगोलिक सीमाओं से बाहर तक फैली सांस्कृतिक उपस्थिति को दर्शाती है।

दीदारगंज यक्षी है प्रमुख आकर्षण

संग्रहालय की प्रमुख कलाकृतियों में मौर्य काल की प्रसिद्ध दीदारगंज यक्षी की प्रतिमा शामिल है। इसे प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। यह प्रतिमा 1917 में पटना के पास मिली थी।

इसके अलावा, यहां कुषाण काल की ‘बुद्ध का जन्म’ दर्शाने वाली शिला, पाल वंश की कुरकिहार बुद्ध की कांस्य प्रतिमा, कुरान की सचित्र पांडुलिपि और सूर वंश के सिक्के भी प्रदर्शित हैं।

सुबह 10 से शाम 5 बजे तक कर सकते हैं भ्रमण

बिहार म्यूजियम की मुख्य दीर्घाएं सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती हैं। संग्रहालय परिसर में स्थित रेस्तरां रात 9 बजे तक खुला रहता है। इतिहास, कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह संग्रहालय बिहार की विरासत को करीब से जानने का प्रमुख केंद्र है।

Share This Article