मंत्री रिजवान अरशद ने 63 सैंपलों की जांच के आधार पर तेल कंपनियों पर सवाल उठाए, वाहन मालिकों के लिए मुआवजा फंड बनाने की मांग की।
E20 पेट्रोल में तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिलाए जाने का आरोप सामने आया है। कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई लैब जांच में कुछ पेट्रोल सैंपलों में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक मिलने का दावा किया गया है। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने लैब रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए इसे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी बताया है।
मंत्री के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद सरकार ने अलग-अलग जिलों के पेट्रोल पंपों से नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई।
63 पेट्रोल सैंपलों की कराई गई जांच
कर्नाटक सरकार ने अलग-अलग जिलों के पेट्रोल पंपों से कुल 63 सैंपल इकट्ठा किए थे। इन्हें संबंधित सरकारी और निजी तेल कंपनियों की प्रयोगशालाओं में भेजकर पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी मांगी गई थी।
सरकार का दावा है कि तेल कंपनियों की ओर से स्पष्ट और पारदर्शी जवाब नहीं मिलने के बाद नमूनों की जांच अधिकृत निजी लैब से कराई गई। मंत्री ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण अगर वाहनों का माइलेज 10 प्रतिशत तक घटता है, तो इससे हर साल करीब 62 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
5 में से 4 पेट्रोल पंपों के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल का दावा
लैब रिपोर्ट के मुताबिक, सात जिलों से लिए गए नमूनों में कई जगह इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। सर्वे के निष्कर्ष में दावा किया गया कि राज्य के हर पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिला पेट्रोल बेचा जा रहा था।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि जांच किए गए किसी भी पेट्रोल पंप के सैंपल में इथेनॉल की मात्रा ठीक 20 प्रतिशत नहीं मिली।
किस कंपनी के पेट्रोल में कितनी इथेनॉल मात्रा मिली?
कर्नाटक सरकार की ओर से सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में अलग-अलग तेल कंपनियों के पेट्रोल सैंपलों में इथेनॉल की मात्रा इस प्रकार बताई गई है:
| तेल कंपनी | पेट्रोल का प्रकार | इथेनॉल की मात्रा |
|---|---|---|
| आईओसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 31.2% |
| एचपीसीएल | पेट्रोल (एमएस-पावर) | 30.5% |
| एचपीसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 27.0% |
| बीपीसीएल | पेट्रोल (एमएस-स्पीड) | 26.5% |
| नायरा | पेट्रोल (एमएस) | 26.1% |
| शेल | पेट्रोल (एमएस) | 25.5% |
| बीपीसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 24.2% |
| बीपीसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 22.6% |
| एचपीसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 22.4% |
| आईओसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 20.8% |
| नायरा | पेट्रोल (एमएस) | 20.6% |
| बीपीसीएल | पेट्रोल (एमएस) | 19.9% |
| एमआरपीएल | पेट्रोल (एमएस) | 19.2% |
| शेल | पेट्रोल (एमएस) | 13.5% |
माइलेज 30 से 40 प्रतिशत तक घटने का दावा
रिपोर्ट के साथ सामने आए दावों में कहा गया है कि इथेनॉल की अधिक मात्रा मिलने से वाहनों का माइलेज 30 से 40 प्रतिशत तक घट सकता है। उदाहरण के तौर पर, जिस कार को बिना इथेनॉल वाले पेट्रोल पर 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज मिलता था, उसे इथेनॉल मिले पेट्रोल पर 10 से 11 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज मिलने का दावा किया गया है।
मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि जिस पेट्रोल को E20 के नाम पर बेचा जा रहा है, उसके कुछ नमूनों में 27 से 31 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला है। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करार दिया।
वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता
रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के मुताबिक, अगर कोई वाहन E10 ईंधन के लिए तैयार किया गया है और उसमें अधिक इथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल किया जाता है, तो उसके इंजन और अन्य हिस्सों पर असर पड़ सकता है। वहीं, E20 के अनुकूल वाहनों में भी निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने पर नुकसान की आशंका जताई गई है।
वाहन मालिकों को मुआवजा देने के लिए फंड बनाने की मांग
कर्नाटक के मंत्री रिजवान अरशद ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार एक स्पॉइलेज फंड बनाए, ताकि तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल करने से प्रभावित वाहन मालिकों को मुआवजा या रिफंड दिया जा सके।
हालांकि, इस मामले में तेल कंपनियों की ओर से ईंधन की गुणवत्ता और जांच के मानकों को लेकर सवाल उठाए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पेट्रोल में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा और जांच के निष्कर्षों को लेकर विवाद बना हुआ है।

