दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी चिंता में डाल दिया है। इसी को देखते हुए मंगलवार को PMO ने उच्च स्तरीय बैठक कर दिल्ली-NCR में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
37% पुराने वाहन अब भी सड़कों पर
सूत्रों के मुताबिक, बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने की।
बैठक में बताया गया कि दिल्ली-NCR में लगभग 37% वाहन अभी भी BS-I से BS-III उत्सर्जन मानकों वाले पुराने वाहन हैं, जो वायु प्रदूषण के बड़े कारणों में शामिल हैं।
अधिकारियों को ऐसे वाहनों की पहचान तेज करने और उन पर कड़ा एक्शन लेने का आदेश दिया गया है।
इस बैठक में EV ईकोसिस्टम के विस्तार, चार्जिंग स्टेशनों और सब्सिडी को तेजी से लागू करने पर भी चर्चा हुई।
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने पर जोर
PMO ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करें, और व्यक्तिगत रूप से भी इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएँ।
सूत्रों के अनुसार, PMO प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर सीधी निगरानी कर रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में कार्रवाई और सख्त हो सकती है।
AQI 400 पार, आधे स्टाफ को WFH का आदेश
दिल्ली और NCR के 20 से अधिक इलाकों में सोमवार को AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
नोएडा और गाजियाबाद में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है।
इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को निर्देश दिया है कि वे 50% कर्मचारियों को घर से काम (WFH) करने की अनुमति दें।
दिल्ली में वाहनों का भारी दबाव
रिपोर्ट के अनुसार,
- NCR में कुल 2.97 करोड़ वाहन रजिस्टर्ड हैं
- इनमें से 1.57 करोड़ वाहन केवल दिल्ली में ही हैं
एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन ने भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को प्रमुख चिंता बताया है।
PMO ने दिल्ली के आसपास के चार राज्यों—हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब—को प्रदूषण कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने को कहा है।

